CJP: ‘बेरोजगारों की आवाज बनेगी CJP’, अभिजीत दीपके का बड़ा ऐलान; बोले- अब सरकार को युवाओं को नौकरी देनी ही होगी
छत्रपति संभाजीनगर में CJP की कोर कमेटी बैठक के बाद अभिजीत दीपके ने कहा कि बेरोजगारी अब राष्ट्रीय संकट है। संगठन देशभर में रोजगार और शिक्षा सुधार को लेकर जनआंदोलन चलाएगा।
CJP: छत्रपति संभाजीनगर में हुई CJP की कोर कमेटी बैठक के बाद संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बेरोजगारी को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि देश में बढ़ती बेरोजगारी अब केवल युवाओं की व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुकी है। CJP आने वाले समय में रोजगार के सवाल को देशव्यापी जनआंदोलन का रूप देने के लिए व्यापक अभियान चलाएगी।
जंतर-मंतर आंदोलन का दिया उदाहरण
दीपके ने कहा कि हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि रोजगार का मुद्दा केवल छात्रों तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में बेरोजगार युवाओं की भागीदारी ने दिखाया कि यह समस्या देश के करोड़ों युवाओं की साझा चिंता बन चुकी है। उन्होंने इसे युवाओं की लोकतांत्रिक एकजुटता का मजबूत संदेश बताया।
शिक्षा और रोजगार दोनों पर होगा फोकस
अभिजीत दीपके ने कहा कि CJP केवल रोजगार की मांग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार को भी अपने अभियान का प्रमुख हिस्सा बनाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से शिक्षा का व्यवसायीकरण हुआ है और इसे मुनाफे का माध्यम बना दिया गया है। संगठन का लक्ष्य ऐसी शिक्षा व्यवस्था की मांग करना है जो युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए।
देशभर में चलाया जाएगा अभियान
दीपके के अनुसार CJP आने वाले महीनों में विभिन्न राज्यों में जनसंवाद, युवा सम्मेलन, बैठकें और जागरूकता अभियान आयोजित करेगी। उनका कहना है कि जब तक रोजगार के मुद्दे पर व्यापक जनदबाव नहीं बनेगा, तब तक स्थायी समाधान संभव नहीं होगा। इसलिए संगठन गांव से लेकर शहर तक युवाओं को जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहा है।
युवाओं से एकजुट होने की अपील
उन्होंने युवाओं से लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों के लिए आगे आने की अपील की। दीपके ने कहा कि देश के विकास में युवाओं की सबसे बड़ी भूमिका है और उन्हें सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। उनका विश्वास है कि यदि युवा संगठित होकर अपनी आवाज उठाएंगे तो रोजगार का मुद्दा राष्ट्रीय नीति निर्माण के केंद्र में आएगा और सरकार पर प्रभावी कदम उठाने का दबाव बनेगा।



