UP News-यूपी में डेयरी उद्योग को मिल रही रफ्तार, निवेश बढ़ा तो गांवों में खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते
UP News-उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में डेयरी सेक्टर को मजबूत करने पर सरकार का विशेष जोर है। दुग्ध उत्पादन के साथ ही दुग्ध प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन, कोल्ड चेन और डेयरी उद्योग की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत किया जाएगा। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ ही महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। बरेली, मुरादाबाद और लखनऊ मंडल प्रदेश के प्रमुख डेयरी हब के रूप में विकसित होने की क्षमता रखते हैं।
यह बात पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने गुरुवार को भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के स्वामी विवेकानंद सभागार में आयोजित डेयरी कॉन्क्लेव स्वर्णिम दुग्धामृत संवाद समागम’ में कही। दुग्धशाला विकास विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में बरेली, मुरादाबाद और लखनऊ मंडल के पशुपालक, दुग्ध उत्पादक, किसान, उद्यमी, निवेशक और विशेषज्ञ समेत 1500 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदेश में उन्नत एवं स्वस्थ गोवंश को बढ़ावा देना, नंद बाबा दुग्ध मिशन और दुग्धशाला विकास एवं दुग्ध प्रोत्साहन नीति-2022 का प्रचार-प्रसार करना तथा डेयरी क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करना रहा। मेरठ और आगरा के बाद बरेली में आयोजित यह तीसरा मंडलीय डेयरी कॉन्क्लेव था।
मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि बरेली, मुरादाबाद और लखनऊ मंडल कृषि, पशुपालन और डेयरी के क्षेत्र में अपार संभावनाओं वाले क्षेत्र हैं। सरकार की प्राथमिकता केवल दूध का उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि दूध से तैयार होने वाले उत्पादों की पूरी श्रृंखला को विकसित करना है। किसानों को उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण और बाजार तक बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराकर उनकी आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
2200 लाभार्थियों को मिला 1200 लाख से अधिक का अनुदान
दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के. ने बताया कि उत्तर प्रदेश देश में दुग्ध उत्पादन में अग्रणी राज्य है। किसानों को सुनिश्चित बाजार, पारदर्शी मूल्य निर्धारण और स्थायी आय उपलब्ध कराने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत बरेली, मुरादाबाद और लखनऊ मंडल में करीब 2200 लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से 1200 लाख रुपये से अधिक की अनुदान राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है। वहीं, दुग्ध नीति-2022 के तहत इन तीनों मंडलों में विभिन्न परियोजनाओं के लिए 1100 लाख रुपये की अनुदान राशि जारी की गई है।
जीबीसी के अंतर्गत बरेली मंडल में 2712 करोड़, मुरादाबाद मंडल में 2085 करोड़ और लखनऊ मंडल में 2150 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों से करीब 11 हजार नए रोजगार सृजित होने की संभावना है। उन्होंने स्वदेशी उन्नत गोवंश, समृद्ध निवेश और सुरक्षित भविष्य के संकल्प को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।
गांवों में बनेंगी दुग्ध विकास समितियां
अपर मुख्य सचिव पशुपालन एवं दुग्ध विकास मुकेश कुमार मेश्राम ने पशुपालकों, किसानों और उद्यमियों का स्वागत करते हुए स्वदेशी नस्ल के गोवंश के पालन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को होने वाले लाभों की जानकारी दी। उन्होंने सरकार की विभिन्न योजनाओं के जरिए पशुपालकों की आय और जीवन स्तर में सुधार की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
मंडलायुक्त शंभु कुमार ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन करने वाला राज्य है। डेयरी क्षेत्र अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव बन चुका है। बरेली मंडल में दुग्ध उत्पादन, पशुपालन, प्रसंस्करण और डेयरी उद्यमिता के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं। महिलाओं और युवाओं को डेयरी से जोड़कर रोजगार और आय के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं।
जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने कहा कि दुग्धशाला विकास के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित यह सम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गांव में दुग्ध विकास समितियों की स्थापना का प्रयास किया जाएगा, ताकि पशुपालकों को गांव में ही दूध का बेहतर मूल्य मिल सके। उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाओं में भी पशुपालन को लेकर काफी रुचि है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी जो महिलाएं गोवंश खरीदना चाहती हैं, उन्हें ऋण के माध्यम से सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
आधुनिक तकनीक और निवेश पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
कार्यक्रम में नंद बाबा दुग्ध मिशन के लाभार्थियों ने अपनी सफलता की कहानियां साझा कीं। बरेली डेयरी, आनन्दा डेयरी, वाडीलाल इंडस्ट्रीज, डेयरी क्राफ्ट और शगुन डेयरी समेत विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने डेयरी क्षेत्र में निवेश, नवाचार और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर प्रस्तुतियां दीं।
विशेषज्ञों ने गोपालन के साथ जैविक खेती, वर्मी कम्पोस्ट और हरे चारे के प्रबंधन की जानकारी भी दी। कार्यक्रम में पराग, डेयरी इंडिया, शगुन डेयरी, वरीशा डेयरी प्रोडक्ट्स, प्रीमियर डेयरी, वाडीलाल, डेयरी क्राफ्ट, पशुपालन विभाग, आईवीआरआई समेत विभिन्न संस्थाओं ने स्टॉल लगाए। यहां आधुनिक डेयरी उपकरणों, दुग्ध परीक्षण तकनीक, उत्पादों और विभिन्न सेवाओं का प्रदर्शन किया गया।
ऑनलाइन माध्यम से भी जुड़े पशुपालक
कार्यक्रम की वेबकास्टिंग और लाइव यूट्यूब प्रसारण के माध्यम से प्रदेश के अन्य जिलों के गोपालक और उद्यमी भी जुड़े। विशेषज्ञों ने नवीनतम तकनीक, स्वदेशी नस्ल के गोवंश पालन, दुग्ध उत्पादन, प्रसंस्करण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मंत्री धर्मपाल सिंह, अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम, दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के., मंडलायुक्त शंभु कुमार, जिलाधिकारी अविनाश सिंह, प्रबंध निदेशक प्रकाश बिंदु सहित आईवीआरआई के वैज्ञानिक, एनडीडीबी के प्रतिनिधि, पशुपालक, किसान, उद्यमी और निवेशक मौजूद रहे। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के सहयोग से कार्यक्रम का सफल आयोजन हुआ। अंत में मुख्य दुग्धशाला विकास अधिकारी ने सभी का आभार व्यक्त किया।



