India Diplomacy : मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत की कूटनीतिक सक्रियता तेज, यूरोप दौरे पर विदेश सचिव विक्रम मिसरी
India Diplomacy : मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत ने कूटनीतिक प्रयास तेज किए। विदेश सचिव विक्रम मिसरी फ्रांस-जर्मनी दौरे पर, जबकि एस जयशंकर यूएई में ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी पर बातचीत कर रहे हैं।
India Diplomacy : मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत ने ऊर्जा, रक्षा और व्यापार सुरक्षा को लेकर अपनी कूटनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। Vikram Misri रविवार से फ्रांस और जर्मनी के तीन दिवसीय दौरे पर जा रहे हैं। इससे पहले वह अमेरिका का दौरा कर चुके हैं। वहीं S. Jaishankar संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहुंच चुके हैं, जहां वह ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी पर अहम बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं।
भारत की यह सक्रियता ऐसे समय में बढ़ी है, जब ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर का ऐलान हुआ है और क्षेत्रीय स्तर पर कूटनीतिक बातचीत जारी है। हाल ही में विक्रम मिसरी ने अमेरिका में वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर मौजूदा हालात पर चर्चा की थी।
अब यूरोप दौरे के दौरान वह France और Germany के साथ रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करेंगे। फ्रांस में ‘भारत-फ्रांस विदेश कार्यालय परामर्श’ के तहत रक्षा, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, साइबर और डिजिटल क्षेत्रों पर चर्चा होगी।
जर्मनी में ‘भारत-जर्मनी परामर्श’ के दौरान व्यापार, हरित ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, शिक्षा और निवेश जैसे मुद्दों पर फोकस रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट संकट का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है, क्योंकि देश तेल और गैस के लिए इस क्षेत्र पर निर्भर है। ऐसे में भारत वैकल्पिक आपूर्ति और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह दौरा
यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब Emmanuel Macron और Friedrich Merz हाल ही में भारत का दौरा कर चुके हैं।
यूरोप के साथ यह कूटनीतिक संवाद भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सौदों और टेक्नोलॉजी साझेदारी को मजबूत करने का अवसर है। इसे भारत के व्यापक ‘एनर्जी मिशन’ का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें यूएई के साथ भी रणनीतिक सहयोग बढ़ाया जा रहा है।



