EMRS Space Lab : देशभर के 75 एकलव्य विद्यालयों में बने स्पेस लैब, 50 हजार जनजातीय छात्रों को मिलेगा अंतरिक्ष विज्ञान का प्रशिक्षण
EMRS Space Lab : जनजातीय कार्य मंत्रालय और बीपीसीएल ने 18 राज्यों के 75 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में स्पेस लैब स्थापित की हैं। इस पहल से 50 हजार से अधिक जनजातीय छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान और STEM शिक्षा का लाभ मिलेगा।
EMRS Space Lab : जनजातीय छात्रों के बीच वैज्ञानिक शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जनजातीय कार्य मंत्रालय और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने देशभर के 18 राज्यों में स्थित 75 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) में अत्याधुनिक स्पेस लैब स्थापित की हैं। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 12 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है।
यह पहल बीपीसीएल की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) योजना के तहत लागू की गई है। इसका उद्देश्य जनजातीय युवाओं को अंतरिक्ष विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) जैसे आधुनिक विषयों से जोड़ना और उनमें वैज्ञानिक सोच विकसित करना है।
जनजातीय कार्य मंत्रालय देशभर में संचालित 499 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के माध्यम से अनुसूचित जनजाति के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा उपलब्ध करा रहा है। इन विद्यालयों में शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य, पोषण और व्यक्तित्व विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है।
नई स्थापित स्पेस लैब में छात्रों के लिए आधुनिक वैज्ञानिक उपकरण और शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें एलवीएम-3 लॉन्च व्हीकल, पृथ्वी अवलोकन उपग्रह, पीएसएलवी, जीएसएटी, आईआरएनएसएस और एचआरएलवी मिशन के मॉडल, स्टार-ट्रैकर टेलीस्कोप, एसटीईएम लर्निंग किट, कैनसैट मॉडल तथा अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी प्रदर्शनियां शामिल हैं।
इस परियोजना को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा मान्यता प्राप्त एजेंसियों के सहयोग से पूरा किया गया है। अनुमान है कि इस पहल से 50,000 से अधिक जनजातीय छात्रों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
स्पेस लैब के माध्यम से छात्र प्रयोग, सिमुलेशन और मॉडल आधारित गतिविधियों के जरिए विज्ञान को व्यावहारिक रूप से समझ सकेंगे। इससे उनकी विश्लेषणात्मक क्षमता, समस्या समाधान कौशल और नवाचार की सोच को बढ़ावा मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल छात्रों को खगोल विज्ञान, उपग्रह तकनीक, अंतरिक्ष अन्वेषण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मौसम विज्ञान और भू-स्थानिक विज्ञान जैसे उभरते क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए प्रेरित करेगी। साथ ही दूरदराज और जनजातीय क्षेत्रों के छात्रों को भी शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों के समान आधुनिक वैज्ञानिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप यह कार्यक्रम अनुभवात्मक शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे भविष्य में भारत के वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्र में जनजातीय युवाओं की भागीदारी और प्रतिनिधित्व बढ़ने की उम्मीद है।



