TMC में घमासान: नाम, चुनाव चिह्न और पार्टी पर दावे को लेकर चुनाव आयोग में आमने-सामने होंगे दोनों गुट

तृणमूल कांग्रेस (TMC) में पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न, संगठन और संपत्तियों पर अधिकार को लेकर ममता बनर्जी और बागी गुट के बीच जारी विवाद अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है। दोनों पक्ष सोमवार को चुनाव आयोग के समक्ष अपने-अपने दावे और समर्थन से जुड़े दस्तावेज पेश करेंगे। माना जा रहा है कि आयोग का फैसला पार्टी के भविष्य के लिए बेहद अहम साबित होगा।

विवाद का केंद्र टीएमसी का घास-फूल चुनाव चिह्न, पार्टी का नाम, कोलकाता स्थित मुख्यालय ‘तृणमूल भवन’ और संगठनात्मक नियंत्रण है। दोनों गुट खुद को “असली टीएमसी” बताते हुए पार्टी पर वैध अधिकार का दावा कर रहे हैं।

बागी गुट का कहना है कि उसे बड़ी संख्या में विधायकों और सांसदों का समर्थन हासिल है। हाल ही में इस गुट ने वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को अपना अध्यक्ष घोषित किया और तृणमूल भवन पर कब्जे का भी दावा किया। वहीं, ममता बनर्जी गुट का आरोप है कि यह पूरा घटनाक्रम भाजपा के इशारे पर किया जा रहा है और पार्टी का मूल संगठन तथा कार्यकर्ताओं का समर्थन उनके साथ है।

चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों से संगठनात्मक ढांचे, निर्वाचित प्रतिनिधियों के समर्थन और अन्य संबंधित दस्तावेज जमा करने को कहा है। आयोग का फैसला केवल चुनाव चिह्न तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे पार्टी के नाम, संपत्तियों और संगठनात्मक नियंत्रण पर भी असर पड़ सकता है।

टीएमसी के 28 साल के इतिहास में यह सबसे बड़ा आंतरिक संकट माना जा रहा है। अब सभी की नजर चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी है, जो पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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