India China Trade Deal: ट्रंप की टैरिफ धमकियों की निकल जाएगी हवा? जिम ओ’नील ने भारत-चीन को दिया बड़ा मंत्र
BRICS का विचार देने वाले अर्थशास्त्री जिम ओ'नील ने कहा कि भारत और चीन अगर मुक्त व्यापार की दिशा में आगे बढ़ते हैं तो अमेरिकी टैरिफ का असर काफी कम किया जा सकता है।
India China Trade Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर दुनिया भर में चिंता बनी हुई है। अमेरिका की ओर से अलग-अलग देशों पर लगाए जा रहे या प्रस्तावित शुल्क ने वैश्विक व्यापार और आर्थिक व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी बीच BRICS नाम देने वाले ब्रिटिश अर्थशास्त्री लॉर्ड जिम ओ’नील ने भारत और चीन को लेकर एक ऐसी सलाह दी है, जो आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा बदल सकती है।
जिम ओ’नील का कहना है कि अगर भारत और चीन अपने आपसी मतभेदों को पीछे छोड़कर मुक्त व्यापार की दिशा में आगे बढ़ते हैं तो अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकता है। उनके मुताबिक, भारत और चीन अगर आपस में बड़े पैमाने पर बिना व्यापारिक बाधाओं के कारोबार शुरू कर दें तो दोनों देशों का संयुक्त बाजार इतना बड़ा हो सकता है कि अमेरिका या पश्चिमी देशों की नीतियों का असर पहले की तुलना में काफी कम हो जाएगा।
एक इंटरव्यू में ओ’नील ने कहा कि अगर भारत और चीन वास्तव में एक-दूसरे के साथ फ्री ट्रेड स्थापित कर लेते हैं तो दुनिया के लिए यह ज्यादा महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देश आपस में कितना कारोबार कर रहे हैं, न कि अमेरिकी राष्ट्रपति टैरिफ को लेकर क्या घोषणा कर रहे हैं। उनका मानना है कि दोनों देशों की आर्थिक ताकत मिलकर वैश्विक व्यापार के समीकरण को बदल सकती है।
जिम ओ’नील का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका की ओर से रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने की चर्चा चल रही है। अमेरिकी सीनेट में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का प्रावधान रखने वाला एक विधेयक पारित होने की खबर है। हालांकि, इसे कानून बनने के लिए प्रतिनिधि सभा की मंजूरी समेत आगे की प्रक्रिया से गुजरना होगा। ऐसे में भारत जैसे देशों के लिए अमेरिकी व्यापार नीति पर नजर रखना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।
ओ’नील के मुताबिक भारत और चीन दुनिया के सबसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजारों में शामिल हैं। दोनों देशों की विशाल आबादी और बढ़ती उपभोक्ता मांग उन्हें एक-दूसरे के लिए बेहद महत्वपूर्ण बाजार बनाती है। यदि दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाएं कम होती हैं और बाजार अधिक खुले होते हैं तो कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं और दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार का حجم काफी बढ़ सकता है।
हालांकि, जिम ओ’नील ने यह भी माना कि भारत और चीन के बीच मुक्त व्यापार समझौता करना आसान नहीं होगा। दोनों देशों के बीच लंबे समय से सीमा विवाद है। इसके अलावा रणनीतिक और भू-राजनीतिक मुद्दों पर भी दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं। दक्षिण एशिया में चीन की बढ़ती गतिविधियों और भारत की सुरक्षा चिंताओं का असर दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों पर भी पड़ता है।
सबसे बड़ी चुनौती व्यापार असंतुलन की भी है। भारत और चीन के बीच मौजूदा व्यापार में चीन का निर्यात काफी अधिक है, जिसके कारण भारत को लंबे समय से बड़ा व्यापार घाटा झेलना पड़ता है। भारत की चिंता यह है कि अगर बाजार पूरी तरह खोल दिया गया तो सस्ते चीनी उत्पाद बड़ी मात्रा में भारतीय बाजार में आ सकते हैं। इससे कई घरेलू उद्योगों और छोटे कारोबारियों पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
यही वजह है कि भारत के लिए चीन के साथ पूरी तरह मुक्त व्यापार की दिशा में आगे बढ़ना रणनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर बेहद संवेदनशील फैसला होगा। भारत को एक तरफ चीन के साथ व्यापार बढ़ाने के अवसर दिखाई देते हैं, तो दूसरी तरफ घरेलू विनिर्माण और रोजगार की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है।
जिम ओ’नील की सलाह ऐसे समय में आई है जब दुनिया तेजी से बदलती वैश्विक व्यापार व्यवस्था का सामना कर रही है। अमेरिका की संरक्षणवादी नीतियां, बढ़ते टैरिफ और अलग-अलग देशों के बीच व्यापारिक तनाव ने कंपनियों और निवेशकों के लिए अनिश्चितता बढ़ाई है। ऐसे में भारत और चीन के बीच बेहतर आर्थिक संबंध वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ा बदलाव साबित हो सकते हैं।
हालांकि, मुक्त व्यापार की राह में मौजूद राजनीतिक, सीमा और आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि भारत और चीन निकट भविष्य में ऐसा कोई बड़ा समझौता कर पाएंगे। फिर भी जिम ओ’नील का सुझाव यह संकेत जरूर देता है कि यदि दोनों एशियाई शक्तियां अपने मतभेदों को सीमित करते हुए आर्थिक सहयोग बढ़ाती हैं, तो वैश्विक व्यापार में उनकी सामूहिक ताकत अमेरिका समेत अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के सामने एक नया संतुलन तैयार कर सकती है।



