P Chidambaram on PM Modi Dimagi Naxal Remark: हम बेवकूफ नहीं हैं…’: पी चिदंबरम ने बताया, पीएम मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान का इशारा किसकी ओर

कांग्रेस नेता ने कहा कि 'अर्बन नक्सल', 'एंटी-नेशनल', 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' और 'दिमागी नक्सल' जैसे शब्दों के जरिए विपक्ष को निशाना बनाया जाता है

P Chidambaram on PM Modi Dimagi Naxal Remark: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर सियासी घमासान जारी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। चिदंबरम का कहना है कि सरकार भले ही इस शब्द को विपक्ष से जोड़ने से इनकार करे, लेकिन राजनीतिक संदर्भ में इसका निशाना कौन है, यह समझना मुश्किल नहीं है।

पी चिदंबरम ने समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर सरकार से इसकी स्पष्ट परिभाषा बताने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री की टिप्पणी विपक्ष के लिए नहीं थी, तो सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर इसका इशारा किसकी तरफ था।

कांग्रेस नेता ने कहा कि पिछले कुछ समय से सरकार के आलोचकों और विपक्षी नेताओं के लिए अलग-अलग शब्दों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। उन्होंने ‘अर्बन नक्सल’, ‘एंटी-नेशनल’ और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ जैसे शब्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया गया।

चिदंबरम ने सवाल उठाया कि आखिर ‘दिमागी नक्सल’ से सरकार का आशय किन लोगों से है। उनके मुताबिक, यदि यह शब्द विपक्ष के लिए नहीं है तो सरकार को इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।

कांग्रेस नेता ने तंज कसते हुए कहा कि विपक्षी नेता इतने समझदार हैं कि राजनीतिक बयानों में दिए गए संकेतों को समझ सकें। उन्होंने कहा कि कम से कम वे यह जरूर जानते हैं कि ऐसे शब्दों का राजनीतिक इस्तेमाल किस संदर्भ में किया जा रहा है।

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से दिए अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में देश में नक्सलवाद और माओवाद के खिलाफ सरकार की कार्रवाई का जिक्र किया था। प्रधानमंत्री ने कहा था कि नक्सलवाद और माओवाद को काफी हद तक पीछे धकेला जा चुका है।

इसी दौरान उन्होंने देश में ऐसी विचारधारा रखने वाले लोगों को पहचानने और उन्हें अलग-थलग करने की बात कही थी। पीएम मोदी के इस बयान के बाद ‘दिमागी नक्सल’ शब्द राजनीतिक चर्चा का प्रमुख मुद्दा बन गया।

प्रधानमंत्री के बयान के बाद विपक्षी दलों के नेताओं ने सवाल उठाया कि ‘दिमागी नक्सल’ से आखिर किन लोगों को संबोधित किया गया है। कांग्रेस नेताओं ने इसे सरकार की राजनीतिक भाषा का हिस्सा बताते हुए आलोचना की।

पी चिदंबरम ने भी इसी कड़ी में अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि सरकार को साफ करना चाहिए कि इस शब्द की परिभाषा क्या है और इसका इस्तेमाल किन लोगों के लिए किया गया।

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विवाद बढ़ने के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर सरकार की ओर से सफाई दी। उन्होंने कहा कि इसका संबंध उन लोगों से है जो माओवादी विचारधारा का समर्थन करते हैं, संविधान को नहीं मानते या अलगाववादी विचारों के पक्ष में खड़े होते हैं।

सरकार की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि राष्ट्र की एकता और अखंडता के खिलाफ सोच रखने वाले लोगों को पहचानना जरूरी है। वहीं कांग्रेस का आरोप है कि सरकार राजनीतिक विरोधियों को अलग-अलग नाम देकर निशाना बनाती है।

इस बयान के बाद अब भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज होती दिखाई दे रही है। भाजपा जहां प्रधानमंत्री के बयान को नक्सल और अलगाववादी विचारधारा के खिलाफ अभियान से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस इसे विपक्ष को निशाना बनाने वाला राजनीतिक बयान बता रही है।

पी चिदंबरम के ताजा बयान ने इस विवाद को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। अब देखना होगा कि सरकार की ओर से इस पर कोई नई प्रतिक्रिया आती है या नहीं। फिलहाल ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर सियासी बहस जारी है और दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं।

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