Gold Price Alert: सोने की कीमत में फिर आएगा उछाल? Goldman Sachs ने दिया बड़ा संकेत
सोने और चांदी की कीमतों में इन दिनों लगातार उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है। ऐसे समय में निवेशकों के लिए Goldman Sachs की एक रिपोर्ट काफी अहम मानी जा रही है। रिपोर्ट में सोने की कीमतों में आगे तेजी की संभावना जताई गई है।
Goldman Sachs का अनुमान है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 2026 के अंत तक 4,900 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। फिलहाल कीमत करीब 4,600 डॉलर प्रति औंस बताई गई है।
क्यों बढ़ सकती है सोने की कीमत?
Goldman Sachs के मुताबिक सोने की कीमत में तेजी के पीछे कई बड़े कारण हैं। इनमें सबसे अहम केंद्रीय बैंकों की बढ़ती सोने की खरीदारी है।
इसके अलावा अमेरिका की ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें भी सोने को सहारा दे रही हैं। दुनिया में बढ़ती भू राजनीतिक अनिश्चितता के बीच निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की तरफ भी रुख कर रहे हैं।
इन परिस्थितियों में सोने की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर दबाव ऊपर की ओर बना रह सकता है।
केंद्रीय बैंक लगातार बढ़ा रहे सोने का भंडार
Goldman Sachs का अनुमान है कि 2026 में केंद्रीय बैंक औसतन हर महीने करीब 50 टन सोना खरीद सकते हैं। यह आंकड़ा 2022 से पहले के औसत 17 टन प्रति माह से काफी ज्यादा है।
केंद्रीय बैंकों की इस खरीदारी का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मांग पर पड़ता है। मांग मजबूत रहने पर कीमतों को भी समर्थन मिलता है।
चीन की खरीदारी पर भी नजर
रिपोर्ट के अनुसार 2026 में केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीदारी में तेजी देखने को मिली है। जून में खरीदारी करीब 100 टन प्रति माह तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि मई में यह आंकड़ा लगभग 66 टन था।
इस दौरान चीन का केंद्रीय बैंक भी सोने की खरीदारी करने वाले प्रमुख संस्थानों में शामिल रहा है। चीन समेत दूसरे देशों की ओर से सोने का भंडार बढ़ाने की रणनीति बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।
रूस यूक्रेन युद्ध के बाद बढ़ा सोने का महत्व
रूस यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों द्वारा रूस के विदेशी मुद्रा भंडार को फ्रीज किए जाने ने भी केंद्रीय बैंकों की रणनीति को प्रभावित किया है।
ऐसे माहौल में कई देश अपने रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। सोने को किसी एक देश या संस्था की देनदारी से जुड़ी संपत्ति नहीं माना जाता। इसलिए वैश्विक तनाव के समय इसे सुरक्षित रिजर्व एसेट के तौर पर देखा जाता है।
ब्याज दरों में बदलाव से भी मिलेगा फायदा
सोने की कीमत पर अमेरिकी ब्याज दरों का भी बड़ा असर पड़ता है। अगर ब्याज दरों में कमी आती है या दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद कमजोर होती है, तो सोना निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक हो सकता है।
सोने से नियमित ब्याज नहीं मिलता। इसलिए जब ब्याज दरें ज्यादा होती हैं, तो निवेशकों के पास दूसरी ब्याज देने वाली संपत्तियों में पैसा लगाने का विकल्प मजबूत रहता है। वहीं ब्याज दरों में कमी की उम्मीद बढ़ने पर सोने की मांग बढ़ सकती है।
2026 के अंत तक 4,900 डॉलर का अनुमान
Goldman Sachs का अनुमान है कि मौजूदा परिस्थितियां बनी रहीं तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 2026 के अंत तक 4,900 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है।
हालांकि, यह एक अनुमान है और वास्तविक कीमत कई आर्थिक तथा वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। अमेरिकी मौद्रिक नीति, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, डॉलर की चाल और भू राजनीतिक तनाव में बदलाव से सोने की कीमत प्रभावित हो सकती है।
इसलिए निवेशकों को केवल किसी एक अनुमान के आधार पर फैसला लेने के बजाय बाजार की स्थिति और अपनी निवेश क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए।



