International News: नेपाल में बाढ़-भूस्खलन ने मचाई तबाही, एक घर से मिले 23 शव; 962 मौतें, 4000 लोग अब भी लापता

राहत और बचाव अभियान के बीच नेपाल से सामने आए दर्दनाक आंकड़े, कई इलाकों में अब भी मलबे के नीचे जिंदगी तलाशने का काम जारी; त्रिशूली नदी के आसपास कई लोग संपर्क से बाहर

International News: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। कई दिनों से जारी राहत और बचाव अभियान के बावजूद तबाही का दायरा कम होता नजर नहीं आ रहा है। मलबे को हटाने के दौरान नुवाकोट जिले के वेत्रवंती इलाके में एक ही घर से 23 शव बरामद होने की खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया है।

आपदा के बाद अब तक करीब 962 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि लगभग 4000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के कारण मृतकों का आंकड़ा आगे और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

एक घर से 23 शव मिलने से मचा हड़कंप

नुवाकोट जिले के वेत्रवंती में मंगलवार को राहतकर्मियों ने एक घर के मलबे की तलाशी शुरू की। अभियान के दौरान वहां से 23 लोगों के शव बरामद किए गए। यह घटना बताती है कि बाढ़ और भूस्खलन ने कई परिवारों को किस कदर अपनी चपेट में लिया है।

लगातार बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन हुआ और कई घर, सड़कें तथा दूसरे निर्माण मलबे में तब्दील हो गए। कई जगहों पर राहत टीमों को पहुंचने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

भारत तक पहुंचा बाढ़ का असर

नेपाल की इस प्राकृतिक आपदा का असर भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी दिखाई दे रहा है। भारत-नेपाल सीमा पर बहने वाली गंडक नदी में 23 शव बहकर आने की जानकारी सामने आई है। भारतीय प्रशासन इन शवों की पहचान और आवश्यक औपचारिकताओं के बाद उन्हें नेपाली अधिकारियों को सौंपने की प्रक्रिया में जुटा है।

नेपाल में हजारों लोगों के लापता होने से उनके परिवारों की चिंता बढ़ती जा रही है। रसुवा जिले के उत्तरगया गांव में ही करीब 350 छात्रों के लापता होने की बात सामने आई है।

हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में फंसे हैं कई कर्मचारी

बाढ़ और भूस्खलन ने नेपाल के कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भी प्रभावित किया है। त्रिशूली नदी पर स्थित त्रिशूली 3ए हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में करीब 40 से 42 इंजीनियर और कर्मचारी फंसे होने की जानकारी है। कई दिनों के बाद भी वहां राहत दलों के पहुंचने में परेशानी बनी हुई है।

वहीं, त्रिशूली 3बी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में इंजीनियरों, अधिकारियों और मजदूरों समेत करीब 118 लोगों के फंसे होने की खबर है। इन लोगों से संपर्क नहीं हो पाने के कारण उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

बाढ़ के बाद अब महामारी का खतरा

प्राकृतिक आपदा के कई दिन गुजरने के बाद प्रभावित इलाकों में एक नई चुनौती सामने आ रही है। मलबे और दलदल में दबे शवों के कारण कई जगहों पर दुर्गंध फैलने लगी है। इससे संक्रमण और बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है।

राहत एजेंसियों के सामने अब सिर्फ लापता लोगों और शवों की तलाश करना ही चुनौती नहीं है, बल्कि प्रभावित इलाकों में साफ-सफाई, सैनिटाइजेशन और संक्रमण की रोकथाम भी जरूरी हो गई है।

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हजारों परिवार अपनों की तलाश में

नेपाल में आई इस आपदा ने बड़ी संख्या में परिवारों को अपनों से अलग कर दिया है। कहीं घर मलबे में बदल गए हैं तो कहीं सड़क और पुल टूटने से गांवों का संपर्क दूसरे इलाकों से कट गया है।

रेस्क्यू टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में तलाशी अभियान चला रही हैं। हालांकि खराब मौसम, भूस्खलन और दुर्गम पहाड़ी इलाकों के कारण बचाव कार्य में कई तरह की मुश्किलें सामने आ रही हैं। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों का पता लगाने और प्रभावित क्षेत्रों में बीमारी फैलने से रोकने की है।

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