India China Relations : अजीत डोभाल जाएंगे चीन, सीमा विवाद पर होगी अहम वार्ता; शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले बढ़ी कूटनीतिक हलचल

India China Relations : NSA अजीत डोभाल चीन में भारत-चीन सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों की बैठक में शामिल हो सकते हैं। शी जिनपिंग के संभावित भारत दौरे से पहले वार्ता को अहम माना जा रहा है।

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India China Relations :  भारत-चीन संबंधों में सुधार की कोशिशों के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल सोमवार को चीन की यात्रा कर सकते हैं। यहां वह भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर विशेष प्रतिनिधियों (Special Representatives) की बैठक में हिस्सा लेंगे। मामले से परिचित लोगों के अनुसार, डोभाल की मंगलवार को चीन के विदेश मंत्री और विशेष प्रतिनिधि तंत्र में उनके समकक्ष वांग यी से मुलाकात हो सकती है।

यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अगले महीने भारत आने की संभावना है। माना जा रहा है कि शी जिनपिंग सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले सकते हैं। हालांकि, दोनों देशों की ओर से अभी इस दौरे की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

25वें दौर की होगी विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता

अजीत डोभाल और वांग यी के बीच प्रस्तावित बैठक सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधि तंत्र के तहत 25वें दौर की वार्ता होगी। यह तंत्र वर्ष 2003 में भारत-चीन सीमा विवाद के समाधान के लिए एक व्यापक ढांचा तैयार करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था। दोनों देशों के बीच करीब 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा को लेकर विवाद है।

डोभाल की चीन यात्रा को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह संभावित शी जिनपिंग यात्रा से ठीक पहले हो रही है। यदि शी सितंबर में भारत आते हैं तो यह करीब सात वर्ष में उनका पहला भारत दौरा होगा।

2020 के बाद रिश्तों में आई थी बड़ी खटास

भारत और चीन के संबंधों में वर्ष 2020 के बाद गंभीर तनाव पैदा हुआ था। लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच लंबे समय तक गतिरोध रहा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को कहा कि 2020 की गर्मियों से 2024 की शरद ऋतु तक दोनों देशों के बीच संबंध बेहद खराब दौर से गुजरे और इसकी मुख्य वजह सीमा क्षेत्रों की स्थिति थी।

अक्टूबर 2024 में लद्दाख में सैन्य गतिरोध समाप्त करने को लेकर दोनों देशों के बीच सहमति बनी। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात हुई और द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने तथा सीमा विवाद पर आगे बढ़ने के उपायों पर सहमति बनी।

कैलाश मानसरोवर यात्रा और सीधी उड़ानें फिर शुरू

तनाव कम करने की दिशा में भारत और चीन ने कुछ कदम उठाए हैं। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली, सीधी उड़ानों को फिर शुरू करना और चीनी नागरिकों के लिए वीजा नियमों में कुछ ढील शामिल है। हालांकि, LAC पर सैन्य तनाव को पूरी तरह कम करने और सैनिकों की तैनाती के मुद्दे पर अभी अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है।

जयशंकर ने स्पष्ट किया है कि भारत-चीन संबंधों की दिशा तय करने में सीमा की स्थिति की अहम भूमिका रहेगी।

सीमा विवाद के समाधान के लिए ‘राजनीतिक दृष्टिकोण’ पर जोर

पिछले वर्ष नई दिल्ली में हुई विशेष प्रतिनिधियों की बैठक में दोनों पक्षों ने सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने को द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया था।

दोनों देशों ने सीमा विवाद के निष्पक्ष, उचित और परस्पर स्वीकार्य समाधान के लिए **राजनीतिक दृष्टिकोण** अपनाने की जरूरत पर सहमति जताई थी। यह प्रक्रिया वर्ष 2005 में तय राजनीतिक मानकों और मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुरूप आगे बढ़ाने की बात कही गई थी।

इसके अलावा सीमा निर्धारण की दिशा में शुरुआती प्रगति के लिए विशेषज्ञ समूह और प्रभावी सीमा प्रबंधन को आगे बढ़ाने के लिए कार्य समूह गठित करने पर भी सहमति बनी थी।

6 अगस्त की WMCC बैठक में भी हुई चर्चा

भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श एवं समन्वय के लिए बने WMCC की बैठक 6 अगस्त को नई दिल्ली में हुई थी। इसमें सीमा निर्धारण, सीमा प्रबंधन, विभिन्न तंत्रों के निर्माण और सीमा पार सहयोग से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई थी।

अब विशेष प्रतिनिधियों की प्रस्तावित बैठक को इन प्रयासों को आगे बढ़ाने की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। डोभाल की यात्रा और संभावित शी जिनपिंग दौरे के बीच होने वाली यह बातचीत भारत-चीन संबंधों के अगले चरण के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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