UP Mau: मऊ डिस्ट्रिक्ट बार में बड़ा विवाद, पूर्व अध्यक्ष प्रमोद सिंह पालीवाल को जारी हुआ कारण बताओ नोटिस
संघ विरोधी गतिविधियों और भ्रामक जानकारी फैलाने के आरोप; 3 दिन में जवाब न देने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
UP Mau: डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन मऊ में अनुशासन और संगठनात्मक मर्यादा को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। संघ और उसके वर्तमान पदाधिकारियों के खिलाफ कथित अमर्यादित व्यवहार तथा भ्रामक सूचनाएं फैलाने के आरोप में पूर्व अध्यक्ष प्रमोद कुमार सिंह पालीवाल को आधिकारिक ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी किया गया है। संघ ने उनसे तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा है।
भीषण गर्मी के बीच DM से मिलने पहुंचा था प्रतिनिधिमंडल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 21 मई 2026 को क्षेत्र में पड़ रही भीषण गर्मी और उमस को देखते हुए अधिवक्ताओं एवं वादकारियों को राहत दिलाने के उद्देश्य से कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश राय के नेतृत्व में वरिष्ठ अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी से मिलने पहुंचा था।
प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया कि अत्यधिक गर्मी के कारण न्यायिक कार्यों में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए उस दिन सूचीबद्ध मामलों में अगली तारीख निर्धारित कर दी जाए, ताकि अधिवक्ताओं और आम नागरिकों को राहत मिल सके।
वार्ता के दौरान हस्तक्षेप का आरोप
डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन का आरोप है कि इसी महत्वपूर्ण वार्ता के दौरान पूर्व अध्यक्ष प्रमोद कुमार सिंह पालीवाल ने अनाधिकृत रूप से हस्तक्षेप किया। आरोप के मुताबिक उन्होंने जिलाधिकारी के सामने वर्तमान अध्यक्ष और महामंत्री की कार्यकारिणी को “भंग” होने की बात जोर-शोर से उठानी शुरू कर दी।
संघ का कहना है कि यह दावा पूरी तरह भ्रामक, निराधार और संगठन विरोधी था, जिससे प्रशासन को भ्रमित करने का प्रयास किया गया। बार पदाधिकारियों ने इसे संगठन की गरिमा के खिलाफ बताया है।
तीन दिनों में मांगा गया स्पष्टीकरण
डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन ने पूर्व अध्यक्ष के इस व्यवहार को गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि यदि तीन दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो संघ के नियमों के अनुसार उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
कचहरी परिसर में चर्चाओं का बाजार गर्म
इस पूरे घटनाक्रम के बाद मऊ कचहरी परिसर में अधिवक्ताओं के बीच संगठनात्मक अनुशासन, आंतरिक राजनीति और बार एसोसिएशन की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अधिवक्ता समुदाय के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की नजर अब पालीवाल के जवाब तथा संघ की अगली कार्रवाई पर टिकी है।



