Mau News: कुर्क जमीन पर जबरन जुताई का आरोप, SDM आदेश के बाद भी ट्रैक्टर लेकर पहुंचे विपक्षी

घोसी तहसील के कपरिया डीह में विवादित जमीन पर कब्जे की कोशिश का आरोप, पीड़ित ने 112 पर दी सूचना

Mau News: मऊ के घोसी तहसील क्षेत्र में उपजिलाधिकारी न्यायालय के कुर्क आदेश के बावजूद विवादित जमीन पर कब्जे और जुताई की कोशिश का मामला सामने आया है। कपरिया डीह निवासी रामाश्रय यादव पुत्र स्वर्गीय हरिहर यादव ने श्याम नारायण और उनके बेटों पर न्यायालय के आदेश की अवहेलना करते हुए कुर्क जमीन पर जबरन कब्जा करने का प्रयास करने का आरोप लगाया है। पीड़ित के अनुसार, 12 अगस्त 2026 को विपक्षी ट्रैक्टर लेकर विवादित खेत पर जुताई करने पहुंचे, जिसके बाद उन्होंने तत्काल 112 नंबर पर पुलिस को सूचना दी।

रामाश्रय यादव का कहना है कि विवादित भूमि को लेकर उपजिलाधिकारी घोसी के न्यायालय में मामला चल रहा है। उनके अनुसार, 8 दिसंबर 2025 को एसडीएम न्यायालय की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 165 के तहत आदेश जारी किया गया था। इस आदेश के तहत विवादित भूखंडों को कुर्क करते हुए प्रभारी निरीक्षक घोसी को सुपुर्ददार नियुक्त किया गया था। साथ ही जमीन को पुलिस की अभिरक्षा में लेकर नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था।

पीड़ित के मुताबिक, कुर्क की गई जमीन में ग्राम कपरिया डीह की गाटा संख्या 688, 722, 750, मिलजुमला गाटा संख्या 731 और 736 शामिल हैं। इसके अलावा ग्राम चमरियांव की गाटा संख्या 301 और 345, ग्राम मोहम्मदपुर की गाटा संख्या 95 तथा ग्राम जमीन सुवाह की गाटा संख्या 214 भी कुर्क आदेश के दायरे में हैं। रामाश्रय यादव का दावा है कि वह इन विवादित खातों में कानूनी रूप से आधे हिस्से के सह-खातेदार हैं।

आरोप है कि न्यायालय के आदेश के बावजूद श्याम नारायण और उनके बेटे ट्रैक्टर लेकर विवादित जमीन पर पहुंचे और जबरन जुताई करने का प्रयास किया। जैसे ही इसकी जानकारी रामाश्रय यादव को हुई, उन्होंने तत्काल आपातकालीन सेवा 112 पर फोन कर पुलिस को सूचना दी।

सूचना मिलने के बाद 112 पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने ट्रैक्टर चला रहे व्यक्ति से कथित तौर पर पूछा कि कुर्क जमीन पर जुताई करने की अनुमति उन्हें किस अधिकारी से मिली है। इस पर विपक्षी पक्ष की ओर से कथित तौर पर बताया गया कि उन्होंने क्षेत्राधिकारी घोसी से पूछकर जुताई शुरू की है।

इसके बाद मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने मामले की स्थिति स्पष्ट करने के लिए क्षेत्राधिकारी घोसी से फोन पर संपर्क किया। पीड़ित के अनुसार, सीओ ने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी को कुर्क जमीन पर जुताई करने की अनुमति नहीं दी है। बताया गया कि संबंधित लोगों को मामले की जानकारी के लिए उपजिलाधिकारी घोसी के पास जाने के लिए कहा गया था।

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मौके पर पुलिस के पहुंचने और अधिकारी से बातचीत के बाद विवादित जमीन पर जुताई की कार्रवाई रुक गई। घटना के बाद पीड़ित परिवार ने प्रशासन से कुर्क जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित करने और न्यायालय के आदेश का पालन कराने की मांग की है।

रामाश्रय यादव का आरोप है कि यदि न्यायालय के कुर्क आदेश के बावजूद विवादित भूमि पर जबरन कब्जे या जुताई का प्रयास किया जाता है, तो इससे कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।

फिलहाल इस मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस और प्रशासन की ओर से मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। पीड़ित पक्ष का कहना है कि विवादित जमीन को लेकर किसी भी तरह की नई स्थिति पैदा न हो, इसके लिए प्रशासन को कुर्क संपत्ति की सुरक्षा और न्यायालय के आदेश के अनुपालन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

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