Neha Singh Rathore on E20 Petrol: नेहा सिंह राठौर का E20 पर हमला, बीजेपी सांसद जनार्दन मिश्रा के बयान पर पूछे तीखे सवाल
बीजेपी सांसद जनार्दन मिश्रा के ‘शुद्ध पेट्रोल’ वाले बयान पर नेहा सिंह राठौर ने सरकार को घेरा और इथेनॉल मिश्रण को लेकर कई सवाल उठाए।
Neha Singh Rathore on E20 Petrol: E20 पेट्रोल को लेकर देश में एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिश्रण को लेकर विपक्षी दल और कई सार्वजनिक हस्तियां सरकार से सवाल पूछ रही हैं। इसी बीच लोक गायिका नेहा सिंह राठौर ने बीजेपी सांसद जनार्दन मिश्रा की एक टिप्पणी को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। नेहा सिंह राठौर ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर E20 पेट्रोल, इथेनॉल की मिलावट और इसके पीछे की नीति को लेकर कई सवाल उठाए हैं।
दरअसल, रीवा से बीजेपी सांसद जनार्दन मिश्रा का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह शुद्ध पेट्रोल की मांग करने वालों पर टिप्पणी करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में सांसद कहते हैं कि हर कोई आज शुद्ध पेट्रोल मांग रहा है, लेकिन शुद्ध पेट्रोल क्या किसी के घर से आएगा? इसी बयान को लेकर नेहा सिंह राठौर ने सरकार और बीजेपी पर निशाना साधा।
नेहा सिंह राठौर ने अपने X हैंडल पर वीडियो शेयर करते हुए कहा कि ‘शुद्ध पेट्रोल क्या तुम्हारे बाप के घर से आएगा?’ यह सवाल वह नहीं, बल्कि बीजेपी सांसद जनार्दन मिश्रा पूछ रहे हैं। नेहा ने सवाल उठाया कि अगर आज शुद्ध पेट्रोल की मांग करने वालों से इस तरह सवाल किया जा रहा है, तो एक साल पहले शुद्ध पेट्रोल कहां से आता था। उन्होंने सांसद के बयान को जनता के प्रति बदजबानी बताते हुए सरकार पर भी हमला बोला।
नेहा सिंह राठौर ने E20 पेट्रोल के मुद्दे को सीधे आम जनता की जेब और अधिकारों से जोड़ते हुए कई सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले पेट्रोल में मिलावट करने वालों को मिलावटखोरी के आरोप में जेल भेजा जाता था, लेकिन अब सरकार खुद पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की नीति को बढ़ावा दे रही है। हालांकि, सरकार की ओर से इथेनॉल मिश्रण को पेट्रोल में अवैध मिलावट के बजाय निर्धारित नीतिगत मिश्रण के तौर पर लागू किया गया है।
अपने वीडियो में नेहा ने सवाल किया कि आखिर पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट किसके कहने पर की जा रही है। उन्होंने यह भी पूछा कि इथेनॉल की फैक्ट्रियां किसके लोगों ने लगाई हैं। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर E20 को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई।
E20 का मतलब ऐसे पेट्रोल से है जिसमें लगभग 20 प्रतिशत इथेनॉल और बाकी हिस्सा पेट्रोल होता है। भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की नीति का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, घरेलू स्तर पर उत्पादित इथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ाना और किसानों के लिए एक अतिरिक्त बाजार तैयार करना बताया गया है। सरकार लंबे समय से पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण का प्रतिशत बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
हालांकि, E20 को लेकर वाहन मालिकों के बीच भी कई सवाल हैं। खासकर पुराने वाहनों में इसके प्रभाव, माइलेज और इंजन की लंबी अवधि की क्षमता को लेकर चर्चा होती रही है। यही वजह है कि E20 केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि आम वाहन मालिकों के लिए भी चिंता और बहस का विषय बन चुका है।
विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को सरकार के खिलाफ राजनीतिक हथियार बना लिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी E20 को लेकर पहले ही सरकार पर निशाना साध चुके हैं। उन्होंने इसे भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए सरकार से सवाल किए थे। आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भी अलग-अलग मौकों पर इथेनॉल मिश्रण और पेट्रोल की कीमतों को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।
Bollywood News: कृति सेनन ने एग्स फ्रीज कराने के फैसले पर तोड़ी चुप्पी
नेहा सिंह राठौर इससे पहले भी अपने राजनीतिक और सामाजिक बयानों को लेकर चर्चा में रही हैं। लोकगीतों और सोशल मीडिया वीडियो के जरिए वह सरकार और राजनीतिक दलों से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाती रही हैं। इस बार उन्होंने बीजेपी सांसद जनार्दन मिश्रा के बयान को आधार बनाकर E20 के मुद्दे को सीधे जनता के सामने रखा है।
इस पूरे विवाद में दो अलग-अलग सवाल एक साथ सामने आ रहे हैं। पहला सवाल यह है कि E20 नीति से देश की ऊर्जा सुरक्षा और पेट्रोलियम आयात पर क्या असर पड़ेगा। दूसरा सवाल यह है कि इसका फायदा आम उपभोक्ता और किसानों तक किस तरह पहुंचता है। सरकार जहां इथेनॉल मिश्रण को पेट्रोलियम आयात घटाने और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की नीति के तौर पर पेश करती है, वहीं विपक्ष इसके आर्थिक प्रभाव, वाहनों के माइलेज और नीति से जुड़े हितों पर सवाल उठा रहा है।
फिलहाल बीजेपी सांसद जनार्दन मिश्रा की टिप्पणी और नेहा सिंह राठौर के जवाब ने E20 के मुद्दे को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। सवाल अब सिर्फ शुद्ध पेट्रोल बनाम E20 का नहीं है, बल्कि यह बहस भी हो रही है कि सरकार की इस नीति का वास्तविक फायदा किसे मिल रहा है और आम वाहन मालिक पर इसका असर क्या पड़ रहा है।


