CPRI Shimla : पश्चिम बंगाल में बढ़ेगी आलू की पैदावार! एरोपोनिक्स और रोगमुक्त बीज से किसानों को मिलेगा फायदा

CPRI Shimla पश्चिम बंगाल में आलू की उत्पादकता बढ़ाने के लिए गुणवत्तापूर्ण रोगमुक्त बीज, एरोपोनिक्स, टिश्यू कल्चर और आधुनिक उत्पादन तकनीकों के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है।

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CPRI Shimla : पश्चिम बंगाल में आलू की उत्पादकता बढ़ाने, किसानों को गुणवत्तापूर्ण और रोगमुक्त बीज उपलब्ध कराने तथा आधुनिक बीज उत्पादन तकनीकों को बढ़ावा देने की दिशा में पहल तेज की जा रही है। इसी क्रम में शनिवार को केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (CPRI), शिमला में पश्चिम बंगाल में आलू उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों और तकनीकी समाधानों को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई।

प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), शिमला के साथ पश्चिम बंगाल से जुड़े अधिकारियों ने श्री संजीव शर्मा और सहायक निदेशक श्री सैकत सरकार की अगुवाई में आयोजित संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान की शोध गतिविधियों, तकनीकी उपलब्धियों और कार्यप्रणाली को समझना था।

इस दौरान पश्चिम बंगाल में आलू उत्पादन से जुड़े विभिन्न मुद्दों और चुनौतियों को संस्थान के वैज्ञानिकों के समक्ष रखा गया। इससे राज्य की वास्तविक कृषि परिस्थितियों के अनुरूप अनुसंधान और तकनीकी हस्तक्षेप विकसित करने की संभावनाओं को बल मिलने की उम्मीद है।

गुणवत्तापूर्ण और रोगमुक्त बीज से बढ़ेगी उत्पादकता

डॉ. ब्रजेश सिंह ने कहा कि आलू की उत्पादकता बढ़ाने में गुणवत्तापूर्ण और रोगमुक्त बीज की उपलब्धता सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक है। पश्चिम बंगाल जैसे प्रमुख आलू उत्पादक राज्य में हाईटेक बीज उत्पादन, टिश्यू कल्चर और एरोपोनिक्स तकनीक के प्रभावी विस्तार से किसानों को स्वस्थ रोपण सामग्री उपलब्ध कराई जा सकती है।

उन्होंने कहा कि इससे आलू की उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाने के साथ किसानों की आय में भी वृद्धि हो सकती है। आलू वानस्पतिक रूप से प्रवर्धित फसल होने के कारण बीज-जनित रोगों के प्रति संवेदनशील है। ऐसे में स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण बीज का इस्तेमाल टिकाऊ और आर्थिक आलू उत्पादन के लिए बेहद जरूरी है।

टिश्यू कल्चर और माइक्रोप्रोपेगेशन से तैयार होगा गुणवत्तापूर्ण बीज

संस्थान की हाईटेक बीज उत्पादन प्रणालियों में टिश्यू कल्चर और माइक्रोप्रोपेगेशन जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। इन तकनीकों से गुणवत्तापूर्ण प्रजनक बीज की गुणवत्ता और बीज गुणन दर में सुधार किया जा सकता है। साथ ही खेत में बीज फसल के संपर्क की अवधि को भी कम करने में मदद मिलती है।

पश्चिम बंगाल में इन तकनीकों के विस्तार से किसानों को स्वस्थ रोपण सामग्री उपलब्ध कराने और राज्य में आलू बीज के मामले में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में मदद मिल सकती है।

वैज्ञानिकों ने बताई उत्पादन से प्रसंस्करण तक की तकनीक

कार्यक्रम में केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान के विभिन्न प्रभागों के प्रमुखों ने अपने-अपने क्षेत्रों की उपलब्धियों, तकनीकी प्रगति और किसानों के लिए उपयोगी तकनीकों की जानकारी दी।

डॉ. आलोक कुमार, अध्यक्ष, सामाजिक विज्ञान प्रभाग ने किसानों तक संस्थान की तकनीकों को पहुंचाने, वैज्ञानिक संचार, किसान-केंद्रित विस्तार गतिविधियों और अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर प्रकाश डाला।

डॉ. जगदेव शर्मा, अध्यक्ष, फसल उत्पादन प्रभाग ने उन्नत आलू उत्पादन तकनीक, फसल प्रबंधन और उत्पादकता बढ़ाने के उपायों की जानकारी दी।

डॉ. संजीव शर्मा, अध्यक्ष, पादप संरक्षण प्रभाग ने आलू में रोग और कीट प्रबंधन, स्वस्थ फसल उत्पादन तथा वैज्ञानिक संरक्षण उपायों पर जानकारी साझा की।

वहीं डॉ. सोम दत्त, अध्यक्ष, फसल प्रसंस्करण एवं कटाई उपरांत प्रौद्योगिकी प्रभाग ने आलू के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, भंडारण और कटाई उपरांत प्रबंधन से जुड़े तकनीकी पहलुओं को रेखांकित किया।

डॉ. दलामू, कार्यकारी अध्यक्ष, फसल सुधार एवं बीज प्रौद्योगिकी (CI&ST) प्रभाग ने उन्नत किस्मों, गुणवत्तापूर्ण एवं रोगमुक्त बीज उत्पादन तथा टिश्यू कल्चर और आधुनिक बीज उत्पादन तकनीकों की भूमिका पर जानकारी दी।

इस दौरान मीडिया प्रतिनिधियों को आलू अनुसंधान की पूरी श्रृंखला – बीज उत्पादन से फसल सुधार, पादप संरक्षण, प्रसंस्करण और किसानों तक तकनीक पहुंचाने तक की जानकारी दी गई।

एकीकृत तकनीक से किसानों को होगा फायदा

विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम बंगाल में आलू की उत्पादकता बढ़ाने के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज के साथ उन्नत किस्मों, संतुलित पोषण, वैज्ञानिक सिंचाई, समेकित रोग एवं कीट प्रबंधन और आधुनिक उत्पादन तकनीकों का एकीकृत इस्तेमाल जरूरी है।

संस्थान द्वारा विकसित उन्नत किस्में और उत्पादन तकनीकें अलग-अलग कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुसार आलू उत्पादन को अधिक कुशल और लाभकारी बनाने में मददगार हो सकती हैं। संस्थान का उद्देश्य आलू की सतत उत्पादकता, गुणवत्ता और उपयोगिता बढ़ाने के साथ वैज्ञानिक तकनीकों को किसानों तक पहुंचाना है।

केंद्र और राज्य के बेहतर समन्वय पर जोर

डॉ. सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार की कृषि अनुसंधान एवं तकनीकी हस्तांतरण पहलों के साथ राज्य सरकारों, कृषि विश्वविद्यालयों, किसानों और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय से पश्चिम बंगाल में आलू की उत्पादकता और बीज आत्मनिर्भरता को नई गति दी जा सकती है।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान इस दिशा में वैज्ञानिक ज्ञान, गुणवत्तापूर्ण बीज और आधुनिक तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

कार्यक्रम के अंत में श्री राजदीप बक्स ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

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