NEET री-एग्जाम में बुरका पहनकर पहुंची छात्रा को रोका गया, अजमेर केंद्र पर एक घंटे तक चला हंगामा
राजस्थान के अजमेर में आयोजित NEET-UG री-एग्जाम के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया जिसने परीक्षा व्यवस्था और दिशा-निर्देशों को लेकर नई बहस छेड़ दी। ब्यावर जिले की रहने वाली एक छात्रा, कुलसुम, जब परीक्षा देने के लिए केंद्र पहुंची तो उसे कथित तौर पर बुरका पहनने की वजह से प्रवेश नहीं दिया गया। इसके बाद परीक्षा केंद्र के बाहर हंगामे जैसी स्थिति बन गई और मामला प्रशासन तक पहुंच गया।
घटना रविवार को अजमेर के सावित्री क्षेत्र स्थित राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय परीक्षा केंद्र की है। कुलसुम निर्धारित समय से पहले केंद्र पहुंची थीं और परीक्षा में शामिल होने की तैयारी कर रही थीं। लेकिन गेट पर तैनात सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। बताया गया कि उनकी पोशाक को लेकर आपत्ति जताई गई, जिसके बाद छात्रा और उसके परिवार ने विरोध शुरू कर दिया।
कुलसुम के पिता मोहम्मद आरिफ ने अधिकारियों से कहा कि उनकी बेटी पहले भी मई में आयोजित NEET परीक्षा में बुरका पहनकर शामिल हो चुकी है और तब किसी तरह की समस्या नहीं हुई थी। उनका कहना था कि यदि सुरक्षा जांच की आवश्यकता है तो वह पूरी की जाए, लेकिन परीक्षा में बैठने से रोकना उचित नहीं है।
देखते ही देखते केंद्र के बाहर बहस तेज हो गई। पुलिसकर्मी, परीक्षा अधिकारी और परिजन सभी मौके पर मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, छात्रा को करीब एक घंटे तक केंद्र के बाहर इंतजार करना पड़ा। इस दौरान कई लोग उसके समर्थन में आगे आए और परीक्षा में शामिल होने का अवसर देने की मांग करने लगे।
मामला बढ़ता देख मीडिया कर्मी भी मौके पर पहुंच गए। इसके बाद अजमेर के जिला कलेक्टर लोक बंधु स्वयं परीक्षा केंद्र पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से परीक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों और सुरक्षा प्रक्रिया के बारे में चर्चा की। प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद छात्रा की आवश्यक जांच की गई और अंततः उसे परीक्षा केंद्र में प्रवेश दे दिया गया।
घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। एजेंसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर स्पष्ट किया कि बुरका पहनकर आई अभ्यर्थी को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी गई थी। NTA ने अपने बयान में कहा कि संबंधित उम्मीदवार ने परीक्षा दी और उसे परीक्षा केंद्र से बाहर नहीं रखा गया।
हालांकि छात्रा को आखिरकार परीक्षा में बैठने का मौका मिल गया, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने परीक्षा केंद्रों पर लागू सुरक्षा और ड्रेस संबंधी नियमों की व्याख्या को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई लोगों का मानना है कि सुरक्षा जांच जरूरी है, लेकिन इसके साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी उम्मीदवार को उसकी सांस्कृतिक या धार्मिक पहचान के कारण अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
अजमेर की यह घटना अब केवल एक परीक्षा केंद्र तक सीमित मामला नहीं रह गई है, बल्कि यह उन चुनौतियों की ओर भी ध्यान खींचती है जिनका सामना विभिन्न पृष्ठभूमियों से आने वाले अभ्यर्थियों को कभी-कभी परीक्षा के दौरान करना पड़ता है। प्रशासन और NTA की ओर से दी गई सफाई के बावजूद यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।



