Nepal Floods 2026 : हाइड्रोपावर टनल में मलबे से जूझ रहे रेस्क्यू टीमें, 1,003 लोगों की मौत; अपनों की तलाश में परिजनों को अब भी उम्मीद
Nepal Floods 2026 : नेपाल में 26 अगस्त की फ्लैश फ्लड से मौतों का आंकड़ा 1,003 पहुंच गया है। हाइड्रोपावर सुरंगों में मलबे के बीच लापता मजदूरों की तलाश जारी है। भारत की टनल रेस्क्यू टीम भी अभियान में शामिल है।

Nepal Floods 2026 : नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के मुताबिक, बाढ़ और इससे जुड़ी घटनाओं में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,003 हो गई है। वहीं, कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
सबसे बड़ी चुनौती हाइड्रोपावर परियोजनाओं में लापता मजदूरों की तलाश को लेकर है। कई सुरंगों में बाढ़ का पानी, कीचड़, बड़े पत्थर और मलबा भर गया है। कुछ जगहों पर सुरंगों के हिस्से भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। रेस्क्यू टीमों को मलबा हटाकर अंदर तक पहुंचने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
लापता पिता की तलाश में 20 साल का बेटा
रासुवा जिले की अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर परियोजना में काम करने वाले 60 वर्षीय लक्ष्मण गुरूंग बाढ़ के बाद से लापता हैं। उनका 20 वर्षीय बेटा अनुश गुरूंग लगातार अपने पिता की तलाश कर रहा है।
अनुश ने बताया कि 26 अगस्त की सुबह करीब 8 बजे उसकी अपने पिता से आखिरी बार बात हुई थी। इसके कुछ ही देर बाद अचानक आई बाढ़ ने परियोजना क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया और लक्ष्मण का कोई पता नहीं चला।
परिवार को उनके साथियों से अलग-अलग जानकारी मिल रही है कि बाढ़ के समय लक्ष्मण सुरंग के अंदर थे या नहीं। ऐसे में परिवार अब सुरंग की पूरी तरह तलाशी लिए जाने का इंतजार कर रहा है।
अनुश का कहना है कि सुरंग की जांच होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। परिवार को अब भी उम्मीद है कि उनके पिता मिल सकते हैं।
122 से ज्यादा लोग अब भी लापता
नुवाकोट स्थित अपर त्रिशूली-3B परियोजना में भी कई लोग लापता हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यहां कम से कम 122 लोगों का अब तक पता नहीं चल पाया है।
58 वर्षीय कमल बहादुर पांडेय की तलाश में उनके बेटे बिवेक पांडेय लगातार रेस्क्यू सेंटर के चक्कर लगा रहे हैं। लापता मजदूरों के परिजनों ने बिदुर स्थित नेपाली सेना के राहत और बचाव केंद्र पर पहुंचकर अधिकारियों से अभियान तेज करने की मांग की।
कई दिनों के दबाव के बाद सोमवार को घटनास्थल पर खुदाई के लिए एक एक्सकेवेटर भी पहुंचाया गया। परिजनों को उम्मीद है कि मलबा और रेत हटने के बाद लापता लोगों के बारे में कोई सुराग मिल सकता है।
सुरंगों में भरा है कीचड़ और मलबा
नेपाली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल राजा राम बस्नेत के मुताबिक, कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं में खोज और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। इन अभियानों में विदेशी विशेषज्ञ भी मदद कर रहे हैं।
रेस्क्यू टीमों को अंधेरी और संकरी सुरंगों में घुसकर काम करना पड़ रहा है। सुरंगों के अंदर कीचड़, बड़े पत्थर और मलबा जमा है। कई स्थानों पर सुरंगों के हिस्से ढहने से रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है।
इसके अलावा, बाढ़ के कारण कई सड़कें और परिवहन मार्ग क्षतिग्रस्त हो गए हैं। पहाड़ी इलाकों में पहले से ही पहुंच मुश्किल थी, लेकिन बाढ़ के बाद कई परियोजनाओं तक पहुंच और भी चुनौतीपूर्ण हो गई है।
भारत की टीम भी बचाव अभियान में शामिल
लापता मजदूरों की तलाश के लिए भारत की टनल रेस्क्यू टीम भी नेपाली सेना के साथ संयुक्त अभियान चला रही है। यह टीम रासुवा जिले के चिलिमे इलाके में महत्वपूर्ण हाइड्रोपावर सुरंगों में खोज और बचाव कार्य में जुटी है।
विशेषज्ञों की मदद से सुरंगों में जमा मलबा हटाने और अंदर फंसे लोगों की तलाश की जा रही है। हालांकि, सुरंगों की खराब स्थिति और लगातार सामने आ रही भौगोलिक चुनौतियों के कारण अभियान में समय लग रहा है।
12 हाइड्रोपावर परियोजनाएं बाढ़ से प्रभावित
नेपाल के इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहन कुमार डांगी के अनुसार, रासुवा और नुवाकोट जिलों में कम से कम 12 हाइड्रोपावर परियोजनाएं बाढ़ से प्रभावित हुई हैं।
इन परियोजनाओं की कुल क्षमता करीब 670 मेगावाट बताई गई है। प्रभावित परियोजनाओं में चार निर्माणाधीन, सात चालू और एक परीक्षण चरण में थी।
डांगी के मुताबिक, हाइड्रोपावर परियोजनाओं के निर्माण से पहले जोखिम आकलन और अन्य जरूरी अध्ययन किए जाते हैं, लेकिन 26 अगस्त को आई बाढ़ का स्तर और उसका प्रभाव बेहद असामान्य था।
फिलहाल लापता मजदूरों के परिवार अपने प्रियजनों की तलाश में रेस्क्यू टीमों की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। परिवारों की मांग है कि सुरंगों और मलबे की तेजी से जांच कर लापता लोगों के बारे में जल्द से जल्द जानकारी जुटाई जाए।



