UP Mau Religion News: शीतला माता मंदिर में मूर्ति विस्थापन का विरोध, पं. मुरली मनोहर मिश्र बोले- ‘शास्त्रों को ताख पर रखकर विकास स्वीकार्य नहीं’

ब्राह्मण विकास परिषद के प्रवक्ता ने मंदिर समिति से मूल स्थान पर विराजमान माता की प्रतिमा को न हटाने की अपील की, पुजारी के रुख का भी समर्थन किया।

UP Mau Religion News: मऊ स्थित सिद्धपीठ शीतला माता मंदिर में माता की प्रतिमा को उसके मूल स्थान से हटाए जाने के प्रस्ताव को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मुद्दे पर ब्राह्मण विकास परिषद के प्रवक्ता पंडित मुरली मनोहर मिश्र ने मंदिर समिति के प्रस्ताव का विरोध करते हुए इसे शास्त्रों के विपरीत बताया है। उन्होंने समिति से निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील करते हुए कहा कि विकास कार्य आवश्यक हैं, लेकिन धार्मिक परंपराओं और शास्त्रीय मर्यादाओं की अनदेखी स्वीकार्य नहीं है।

‘मूल स्थान से मूर्ति हटाना शास्त्रों के विरुद्ध’

पं. मुरली मनोहर मिश्र ने कहा कि शीतला माता सिद्धपीठ में अपनी मूल स्थापना के साथ विराजमान हैं। उनके अनुसार किसी सिद्धपीठ में स्थापित देवी-देवता की प्रतिमा को मूल स्थान से हटाना धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुरूप नहीं माना जाता।

उन्होंने कहा कि यदि प्रतिमा को उसके मूल स्थान से हटाया जाता है तो उस स्थान की आध्यात्मिक और धार्मिक महत्ता प्रभावित हो सकती है। इसलिए मंदिर समिति को ऐसा कोई निर्णय लेने से पहले गंभीरता से विचार करना चाहिए।

अन्य प्रसिद्ध मंदिरों का दिया उदाहरण

उन्होंने अपने बयान में कहा कि देश के कई प्रमुख धार्मिक स्थलों पर समय-समय पर विकास और सौंदर्यीकरण के कार्य हुए हैं, लेकिन कहीं भी मूल प्रतिमा या परंपरागत स्वरूप के साथ छेड़छाड़ नहीं की गई।

उन्होंने मऊ के वनदेवी माता मंदिर और मिर्जापुर के विंध्याचल माता मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी विकास कार्य हुए, लेकिन धार्मिक परंपराओं का पूरा सम्मान किया गया।

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‘समिति माता से बड़ी नहीं हो सकती’

पं. मुरली मनोहर मिश्र ने कहा कि शीतला माता धाम एक सिद्धपीठ है और किसी भी समिति या व्यक्ति को ऐसा निर्णय लेने का अधिकार नहीं होना चाहिए जो शास्त्रों के विपरीत हो।

उन्होंने मंदिर के पुजारी दीपक जी के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि उनका पक्ष धार्मिक परंपराओं और शास्त्रीय मान्यताओं के अनुरूप है। उन्होंने दोहराया कि माता की प्रतिमा को उसके मूल स्थान से नहीं हटाया जाना चाहिए।

विकास हो, लेकिन परंपराओं का सम्मान भी रहे

ब्राह्मण विकास परिषद के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि उनका संगठन मंदिर के विकास का विरोध नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि मंदिर का भव्य विकास होना चाहिए, श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं भी विकसित की जानी चाहिए, लेकिन यह सब धार्मिक मर्यादाओं और शास्त्रीय परंपराओं का सम्मान करते हुए किया जाना चाहिए।

उन्होंने मंदिर समिति से आग्रह किया कि किसी भी अंतिम निर्णय से पहले धर्माचार्यों, विद्वानों और संबंधित पक्षों से व्यापक विचार-विमर्श किया जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का धार्मिक विवाद उत्पन्न न हो।

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