India UK FTA CETA: India-UK FTA लागू, पीएम मोदी बोले- भारतीयों को बहुत मदद देगा यह समझौता0
CETA और सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट लागू होने पर पीएम मोदी ने जताई खुशी, किसानों, MSME और भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए बताए नए अवसर
India UK FTA CETA: भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) और सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट अब आधिकारिक तौर पर लागू हो गए हैं। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक नया अध्याय बताते हुए कहा कि यह समझौता भारत के किसानों, छोटे कारोबारियों, निर्यातकों और विशेष रूप से ब्रिटेन में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि CETA और सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती देंगे। उनके मुताबिक, यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि टेक्नोलॉजी, निवेश, नवाचार और प्रतिभा के आदान-प्रदान को भी गति देगा।
उन्होंने कहा कि यह भारत और ब्रिटेन के बीच भरोसे पर आधारित भविष्य की साझेदारी का प्रतीक है और दोनों देश साझा समृद्धि की दिशा में मिलकर आगे बढ़ेंगे।
किसानों और MSME को कैसे होगा फायदा?
सरकार का मानना है कि इस समझौते से भारतीय कृषि उत्पादों, छोटे और मझोले उद्योगों (MSME) तथा निर्यातकों को ब्रिटेन के बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। इससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और कई क्षेत्रों में नए व्यापारिक अवसर पैदा होंगे।
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भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए बड़ी राहत
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट का जिक्र करते हुए कहा कि इससे ब्रिटेन में सीमित अवधि के लिए काम करने वाले भारतीय पेशेवरों को काफी राहत मिलेगी। साथ ही भारतीय कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा भी मजबूत होगी।
भारत-यूके व्यापार को मिलेगी रफ्तार
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारतीय निर्यातकों को चीन और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में ला सकता है। फिलहाल ब्रिटेन के कुल आयात में भारत की हिस्सेदारी काफी कम है। ऐसे में यह समझौता भारतीय कंपनियों और सेवा क्षेत्र के लिए नए अवसर लेकर आ सकता है।
भारत और ब्रिटेन के बीच लागू हुआ यह मुक्त व्यापार समझौता आने वाले वर्षों में व्यापार, निवेश और रोजगार के क्षेत्र में अहम बदलाव ला सकता है। सरकार को उम्मीद है कि इससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत होंगे।



