Taslima Nasreen: तसलीमा नसरीन 20 साल बाद लौटी कोलकाता , आखिर ऐसा क्या हुआ था की 32 साल पहले देश छोड़ना पड़ा देश

बांग्लादेश की प्रसिद्द लेखिका तस्लीमा नसरीन को १९९४ में लज्जा के प्रकाशन के बाद छोड़ना पड़ा था बांग्लादेश , १ अगस्त को दो दशक बाद लौट रही भारत

Taslima Nasreen: करीब दो दशक बाद चर्चित लेखिका तसलीमा नसरीन एक बार फिर कोलकाता आने जा रही हैं। उन्होंने घोषणा की है कि वह 1 अगस्त को रवींद्र सदन में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी। उनकी वापसी को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में बयानबाजी शुरू हो गई है और अभिव्यक्ति की आजादी से लेकर धार्मिक संवेदनशीलता तक कई मुद्दों पर बहस तेज हो गई है।

‘लज्जा’ बनी विवाद की वजह

तसलीमा नसरीन 1993 में प्रकाशित अपने चर्चित उपन्यास ‘लज्जा’ के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आईं। इस पुस्तक में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हुई हिंसा और उत्पीड़न का जिक्र किया गया था। किताब के प्रकाशन के बाद कट्टरपंथी संगठनों ने उनका विरोध शुरू कर दिया और उनके खिलाफ कई फतवे जारी किए गए।

लगातार मिल रही धमकियों के बीच तसलीमा को 1994 में बांग्लादेश छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने यूरोप और अमेरिका में निर्वासन का जीवन बिताया।

कोलकाता को माना अपना सांस्कृतिक घर

कई वर्षों तक विदेश में रहने के बाद तसलीमा 2004 में भारत आईं और कोलकाता में रहने लगीं। बांग्ला भाषा और संस्कृति से गहरे जुड़ाव के कारण वह कोलकाता को अपना ‘सांस्कृतिक घर’ मानती रही हैं। इस दौरान उन्होंने कई बांग्ला समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के लिए नियमित लेखन भी किया।

2007 में क्यों छोड़ना पड़ा कोलकाता?

कोलकाता में भी तसलीमा का विवाद खत्म नहीं हुआ। उनकी आत्मकथा ‘द्विखंडित’ को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। कुछ संगठनों ने किताब के कुछ हिस्सों को धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताया।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब 2007 में शहर के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन और आगजनी हुई। कानून-व्यवस्था बिगड़ने के बाद तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार ने हालात नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की। बढ़ते तनाव के बीच तसलीमा को कोलकाता छोड़कर पहले नई दिल्ली और बाद में विदेश जाना पड़ा।

अब फिर होगी कोलकाता वापसी

तसलीमा नसरीन ने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी है कि वह 1 अगस्त को कोलकाता में आयोजित कट्टरवाद-विरोधी साहित्यिक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी और कविता पाठ भी करेंगी। उनकी इस घोषणा के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।

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वापसी पर शुरू हुई सियासत

तसलीमा की प्रस्तावित यात्रा को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं। एक ओर इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दल इसे अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं।

करीब 32 साल पहले बांग्लादेश छोड़ने और 20 साल पहले कोलकाता से जाने के बाद अब तसलीमा नसरीन की वापसी केवल एक साहित्यिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय भी बन गई है।

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