‘मैं आत्महत्या कर लूंगा’, जब मनमोहन सिंह ने एसवाई कुरैशी से कही थी भावुक बात, किताब में बड़ा खुलासा
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी की नई किताब में खुलासा हुआ है कि 2012 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चुनाव आयोग की गरिमा पर चिंता जताते हुए उनसे कहा था, 'अगर चुनाव आयोग की साख को नुकसान पहुंचा तो मैं आत्महत्या कर लूंगा।' जानिए पूरा मामला।
नई दिल्ली: पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) एसवाई कुरैशी की आने वाली किताब “इंडिया एंड आई : ए हंड्रेड मेमोरीज, नॉट ए मेमॉयर” में एक ऐसा प्रसंग सामने आया है, जिसने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के संवैधानिक संस्थाओं के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता की नई तस्वीर पेश की है। किताब के मुताबिक, वर्ष 2012 में चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा को लेकर हुई बातचीत के दौरान मनमोहन सिंह ने भावुक होकर कहा था कि यदि चुनाव आयोग की गरिमा को नुकसान पहुंचा, तो वह “आत्महत्या कर लेंगे।”
कुरैशी के अनुसार, यह घटना जनवरी 2012 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान हुई। उस समय तत्कालीन केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने चुनावी सभा में मुस्लिम समुदाय के लिए आरक्षण बढ़ाने का वादा किया था। इस बयान को लेकर चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज हुई। चार दिनों तक चली सुनवाई में कांग्रेस की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी और भाजपा की ओर से अरुण जेटली ने अपना पक्ष रखा। सुनवाई के बाद चुनाव आयोग ने आचार संहिता के उल्लंघन पर सलमान खुर्शीद की निंदा की, जो आयोग की ओर से उपलब्ध सबसे कड़ी कार्रवाई मानी जाती थी।
किताब के अनुसार, आयोग की कार्रवाई के बाद कांग्रेस के कुछ नेताओं ने चुनाव आयोग के रवैये पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। एसवाई कुरैशी लिखते हैं कि व्यक्तिगत आलोचना से उन्हें कभी परेशानी नहीं हुई, लेकिन जब संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जाने लगे तो उन्हें गहरी चिंता हुई। उन्होंने यह चिंता प्रधानमंत्री कार्यालय तक भी पहुंचाई।
कुरैशी के मुताबिक, उनकी शिकायत की जानकारी तत्कालीन प्रधानमंत्री के प्रेस सचिव हरीश खरे ने मनमोहन सिंह को दी। अगले ही दिन प्रधानमंत्री कार्यालय से उन्हें तत्काल मिलने का संदेश मिला। शाम को प्रधानमंत्री आवास पर मुलाकात के दौरान मनमोहन सिंह ने बेहद भावुक स्वर में कहा कि यदि उन्हें पहले इस मामले की जानकारी होती तो वह संबंधित मंत्रियों को तुरंत फटकार लगाते।
कुरैशी ने अपनी किताब में लिखा है कि बातचीत के दौरान मनमोहन सिंह ने चुनाव आयोग को भारत का गौरव बताते हुए कहा कि यह केवल एक संवैधानिक संस्था नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की आत्मा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कभी भविष्य में ऐसी कोई समस्या हो तो सीधे उन्हें फोन किया जाए।
एसवाई कुरैशी ने इस घटना का उल्लेख करते हुए लिखा है कि मनमोहन सिंह उन विरले नेताओं में थे जिनके लिए संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि गहरा व्यक्तिगत विश्वास था। उनके अनुसार, इस मुलाकात के बाद चुनाव आयोग को लेकर चल रही बयानबाजी स्वतः शांत हो गई और किसी अतिरिक्त हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं पड़ी।
किताब में साझा किए गए हैं 100 संस्मरण
एसवाई कुरैशी की पुस्तक में उनके प्रशासनिक जीवन से जुड़े 100 महत्वपूर्ण अनुभवों और घटनाओं का उल्लेख किया गया है। इनमें चुनाव आयोग, प्रशासनिक सेवा और देश के कई प्रमुख नेताओं से जुड़े संस्मरण शामिल हैं।



