PM मोदी की चेतावनी : दुनिया नहीं संभली तो फिर लौट सकती है भारी गरीबी, ऊर्जा संकट पर जताई चिंता

PM नरेंद्र मोदी ने वैश्विक ऊर्जा संकट, युद्ध और कोविड के असर को लेकर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर हालात नहीं सुधरे तो दुनिया में भारी गरीबी लौट सकती है। ईंधन बचत और खर्च में कटौती की अपील भी की।

हेग/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने वैश्विक आर्थिक संकट, युद्ध और ऊर्जा आपूर्ति पर गहराते खतरे को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। नीदरलैंड्स के हेग में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अगर दुनिया ने मौजूदा संकटों पर जल्द नियंत्रण नहीं पाया, तो पिछले कई दशकों में गरीबी हटाने के लिए हुई प्रगति खत्म हो सकती है और करोड़ों लोग फिर से गरीबी में धकेले जा सकते हैं।

अपने यूरोपीय दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया लगातार नई चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने कोविड महामारी, अंतरराष्ट्रीय युद्धों और ऊर्जा संकट का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा दशक “आपदाओं का दशक” बनता जा रहा है।

कोविड, युद्ध और ऊर्जा संकट से बढ़ा वैश्विक दबाव

पीएम मोदी ने कहा कि पहले दुनिया ने कोरोना महामारी का सामना किया, फिर कई क्षेत्रों में युद्ध शुरू हुए और अब ऊर्जा संकट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हालात नहीं सुधरे तो विकासशील देशों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ेगा।

प्रधानमंत्री ने भारतीयों से ऊर्जा बचत और जिम्मेदार खपत अपनाने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि विदेशी मुद्रा बचाने और वैश्विक संकट के असर को कम करने के लिए लोगों को केवल जरूरत भर संसाधनों का उपयोग करना चाहिए।

ईंधन बचत को बताया देशभक्ति

हाल ही में हैदराबाद में दिए गए अपने भाषण का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने लोगों से घर से काम करने, गैरजरूरी विदेश यात्राएं कम करने और ईंधन बचाने की अपील की थी। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन, कारपूलिंग और उर्वरकों के सीमित उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही।

उन्होंने कहा कि कोविड काल में रिमोट वर्क सामान्य हो गया था और अब ऐसे उपाय आर्थिक दबाव कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से बढ़ी चिंता

सरकारी तेल कंपनियों Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum ने चार साल बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹97.77 और डीजल ₹90.67 प्रति लीटर पहुंच गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन कीमतों में इस बढ़ोतरी का असर आने वाले महीनों में महंगाई, ट्रांसपोर्ट लागत और घरेलू खर्चों पर दिखाई देगा।

होरमुज़ जलडमरूमध्य संकट से बढ़ा खतरा

वैश्विक ऊर्जा संकट की बड़ी वजह ईरान द्वारा Strait of Hormuz को बंद किया जाना माना जा रहा है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल व्यापार का रास्ता इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।

International Energy Agency ने इसे वैश्विक तेल बाजार के इतिहास की सबसे बड़ी आपूर्ति बाधाओं में से एक बताया है। भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है। ऐसे में भारत पर इस संकट का असर ज्यादा पड़ सकता है।

विपक्ष ने सरकार को घेरा

विपक्षी दलों ने पीएम मोदी की ‘खर्च में कटौती’ वाली अपील पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि चुनाव खत्म होने के बाद सरकार ने ईंधन कीमतें बढ़ाने का फैसला लिया, जबकि कच्चे तेल की कीमतें पहले कम थीं।

वहीं बीजेपी ने कीमतों में बढ़ोतरी का बचाव करते हुए कहा कि सरकार ने लंबे समय तक वैश्विक तेल संकट का पूरा बोझ जनता पर नहीं डाला और सीमित बढ़ोतरी की।

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