Business Update: अमेरिका बना भारत का नया गैस पार्टनर, 22 लाख टन LPG डील से मिली राहत

मिडिल ईस्ट संकट के बाद भारत ने बदली आयात रणनीति, कई नए देशों से बढ़ाई गैस खरीद

Business Update: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान युद्ध के बाद भारत ने अपनी एलपीजी (LPG) आयात रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। लंबे समय से मिडिल ईस्ट के देशों पर निर्भर भारत अब गैस आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए नए विकल्प तलाश रहा है। इसी रणनीति के तहत अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है।

ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, हालिया संकट के दौरान पश्चिम एशिया से एलपीजी की आपूर्ति में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। ऐसे में भारत ने अमेरिका समेत कई अन्य देशों से गैस आयात बढ़ाकर घरेलू बाजार में आपूर्ति को स्थिर बनाए रखा। इससे देश में रसोई गैस की कोई बड़ी कमी नहीं हुई, हालांकि लंबी दूरी से आयात के कारण परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ गई है।

मिडिल ईस्ट से घटा आयात

आंकड़ों के मुताबिक मार्च के दौरान भारत का कुल एलपीजी आयात घटा, वहीं पश्चिम एशिया से आने वाली गैस की हिस्सेदारी भी काफी कम हो गई। पहले जहां अधिकांश आपूर्ति मिडिल ईस्ट से होती थी, वहीं अब अन्य क्षेत्रों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता ने भारत को ऊर्जा आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोतों की ओर तेजी से कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

अमेरिका के साथ 22 लाख टन की बड़ी डील

भारतीय तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने वर्ष 2026 के लिए अमेरिका से 22 लाख मीट्रिक टन एलपीजी आयात करने का बड़ा समझौता किया है। यह सौदा भारत की कुल आयात आवश्यकता का लगभग 10 प्रतिशत माना जा रहा है।

जानकारों के अनुसार, इस समझौते के तहत हर महीने कई बड़े गैस टैंकर अमेरिका से भारत पहुंचेंगे। वर्ष 2026 के शुरुआती महीनों में ही भारत बड़ी मात्रा में अमेरिकी एलपीजी आयात कर चुका है, जिससे अमेरिका की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ ही महीनों में भारत के एलपीजी आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी कई गुना बढ़ गई है, जो भारत की नई ऊर्जा रणनीति को दर्शाता है।

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कई नए देशों से भी बढ़ी खरीद

अमेरिका के अलावा भारत ने अर्जेंटीना, चिली, फ्रांस, नीदरलैंड और अन्य देशों से भी एलपीजी आयात बढ़ाया है। वहीं ईरान की भी सीमित स्तर पर आपूर्ति में वापसी देखने को मिली है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आयात स्रोतों में विविधता लाने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता कम होगी। हालांकि इसका दूसरा पक्ष यह है कि दूरस्थ देशों से आयात के कारण माल ढुलाई खर्च में वृद्धि हो रही है।

ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का फोकस

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत दुनिया के सबसे बड़े एलपीजी उपभोक्ता देशों में शामिल है। ऐसे में सरकार और तेल कंपनियां यह सुनिश्चित करने में जुटी हैं कि वैश्विक संकटों का असर घरेलू उपभोक्ताओं पर कम से कम पड़े।

अमेरिका के साथ हुआ यह बड़ा समझौता केवल गैस आयात तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बहु-स्रोत रणनीति पर और अधिक जोर देगा, जिससे भविष्य में किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट का प्रभाव सीमित किया जा सके।

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