केतन अग्रवाल हत्याकांड: सिया गोयल और चेतन चौधरी की पुलिस हिरासत 3 जुलाई तक बढ़ी, जांच में जुटी पुलिस

पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में जांच अभी भी तेज़ी से जारी है। मामले के मुख्य आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी को 29 जून को लोनावला पुलिस ने मावल कोर्ट में पेश किया, जहां पुलिस ने दोनों की हिरासत बढ़ाने की मांग की। अदालत ने पुलिस के तर्कों को सुनने के बाद दोनों आरोपियों की पुलिस हिरासत 3 जुलाई तक बढ़ाने का फैसला सुनाया।

पुलिस का कहना है कि मामले की कई महत्वपूर्ण कड़ियों की जांच अभी बाकी है और कुछ अहम डिजिटल तथा फोरेंसिक साक्ष्यों की पड़ताल जारी है।

पुलिस ने क्यों मांगी हिरासत बढ़ाने की मांग?

सुनवाई के दौरान पुलिस ने अदालत को बताया कि कथित हत्या की साजिश से जुड़े कई पहलुओं की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों के मोबाइल फोन से डिलीट किए गए डेटा को पुनः प्राप्त करने और उसका विश्लेषण करने की प्रक्रिया जारी है।

पुलिस का मानना है कि डिजिटल साक्ष्य मामले की सच्चाई सामने लाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसके अलावा अधिकारियों को यह भी पता लगाना है कि घटना से पहले और दौरान आरोपियों ने किन-किन लोगों से संपर्क किया था।

मोबाइल डेटा और डिजिटल गतिविधियां जांच के केंद्र में

जांच टीम आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, चैट हिस्ट्री और अन्य डिजिटल गतिविधियों की बारीकी से जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित साजिश की योजना किस प्रकार बनाई गई और क्या इसके लिए किसी वैकल्पिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या अन्य डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया गया था।

अधिकारियों का मानना है कि तकनीकी जांच से मामले के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश पड़ सकता है।

पासपोर्ट की बरामदगी अब भी बाकी

पुलिस ने अदालत को बताया कि केतन अग्रवाल का पासपोर्ट अभी तक बरामद नहीं हो सका है। जांच में यह दावा सामने आया है कि यात्रा के दौरान इसे कथित तौर पर फेंक दिया गया था।

पासपोर्ट की बरामदगी को पुलिस महत्वपूर्ण साक्ष्य मान रही है, क्योंकि इससे घटनाक्रम और आरोपियों की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी मिल सकती है।

लोहागढ़ किले पर पहले से की गई थी रेकी?

जांच एजेंसियां इस संभावना की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या घटना से पहले लोहागढ़ किले और उसके आसपास के क्षेत्र की रेकी की गई थी। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों ने पहले से किसी योजना के तहत स्थान का चयन किया था या नहीं।

इस संबंध में विभिन्न साक्ष्यों और उपलब्ध जानकारियों की जांच की जा रही है।

अपराध स्थल का पुनर्निर्माण फिर से होगा

पुलिस ने अदालत को बताया कि अपराध स्थल का पुनर्निर्माण पहले किया जा चुका है, लेकिन अब दोनों आरोपियों की मौजूदगी में घटनाक्रम को दोबारा समझने की आवश्यकता है।

जांचकर्ताओं का मानना है कि इससे घटना के क्रम, आरोपियों की भूमिका और संभावित साजिश से जुड़े तथ्यों को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।

अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच

मामले में केवल दो आरोपियों की भूमिका तक जांच सीमित नहीं है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या किसी अन्य व्यक्ति ने कथित साजिश, योजना या तैयारी में किसी प्रकार की सहायता की थी।

जांच एजेंसियां सभी संभावित संपर्कों और घटनाओं की कड़ियों को जोड़ने में लगी हुई हैं।

बचाव पक्ष ने हिरासत बढ़ाने का किया विरोध

दूसरी ओर, आरोपियों के वकीलों ने पुलिस हिरासत बढ़ाने का विरोध किया। बचाव पक्ष का तर्क था कि अधिकांश तकनीकी जांच, पूछताछ और घटनास्थल से संबंधित आवश्यक प्रक्रियाएं पहले ही पूरी की जा चुकी हैं।

वकीलों ने अदालत से यह भी कहा कि शेष जांच मुख्य रूप से तकनीकी प्रकृति की है, जिसके लिए आरोपियों को लगातार पुलिस हिरासत में रखना आवश्यक नहीं है। साथ ही गिरफ्तारी की वैधता को लेकर भी सवाल उठाए गए।

जांच के अगले चरण पर सबकी नजर

केतन अग्रवाल हत्याकांड ने देशभर में व्यापक चर्चा पैदा की है। अब जांच एजेंसियों का फोकस डिजिटल साक्ष्यों, घटनास्थल से जुड़े तथ्यों और संभावित साजिश के हर पहलू को स्पष्ट करने पर है।

3 जुलाई तक बढ़ी पुलिस हिरासत के दौरान जांच टीम कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर काम करेगी। आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और भी अहम खुलासे सामने आने की संभावना है।

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