दशकों पुराना नर्मदा विवाद खत्म: अमित शाह की मौजूदगी में चार राज्यों में बनी सहमति, विस्थापितों को बड़ी राहत
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र ने नर्मदा परियोजना से जुड़े दशकों पुराने विवाद को सुलझाने पर सहमति जताई। विस्थापितों के पुनर्वास, भूमि मुआवजे और लंबित भुगतान के मुद्दों पर बड़ा फैसला लिया गया।
नई दिल्ली। नर्मदा नदी परियोजना से जुड़े दशकों पुराने विवाद के समाधान की दिशा में मंगलवार को बड़ा फैसला लिया गया। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र ने विस्थापन, भूमि मुआवजा और लंबित भुगतान से जुड़े मुद्दों पर सहमति बना ली। इस फैसले को नर्मदा परियोजना से प्रभावित हजारों परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल के अलावा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मौजूद रहे। सभी राज्यों ने आपसी समन्वय से लंबित मामलों का जल्द निपटारा करने और प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने पर सहमति जताई।
पुनर्वास, मुआवजा और लंबित भुगतान पर बनी सहमति
बैठक में जल-प्लावित क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के पुनर्वास, भूमि अधिग्रहण के मुआवजे और वर्षों से लंबित भुगतान जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों के मुताबिक, लंबे समय से लंबित विवाद के कारण हजारों प्रभावित परिवारों को पुनर्वास और मुआवजा संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
अब चारों राज्यों की सहमति के बाद इन लंबित मामलों के समाधान की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
सहकारी संघवाद का उदाहरण बताया
केंद्र सरकार ने इस समझौते को सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। सरकार का कहना है कि राज्यों के बीच बेहतर समन्वय से जल संसाधनों से जुड़े पुराने विवादों का समाधान तेजी से संभव हो रहा है।
सरकार ने यह भी उल्लेख किया कि हाल के वर्षों में किशाऊ बांध परियोजना और राजस्थान-हरियाणा के यमुना जल विवाद जैसे मामलों में भी सकारात्मक प्रगति देखने को मिली है।
विकास कार्यों को मिलेगी नई रफ्तार
सरकार के अनुसार, नर्मदा परियोजना पर बनी यह सहमति जल संसाधनों के न्यायसंगत उपयोग, राज्यों के बीच सहयोग और परियोजना प्रभावित लोगों के हितों की रक्षा की दिशा में अहम कदम है। इस समझौते से न केवल दशकों पुराने विवाद के समाप्त होने की उम्मीद है, बल्कि नर्मदा परियोजना से जुड़े विकास कार्यों को भी नई गति मिलने की संभावना है।



