Sports News: AI से ‘गर्लफ्रेंड’ बताकर तस्वीरें वायरल करने पर हाई कोर्ट पहुंचे अभिषेक शर्मा, जानिए कोर्ट में क्या हुआ

AI के जरिए तस्वीरों को कथित तौर पर तोड़-मरोड़कर पेश करने और महिला मैनेजर को 'गर्लफ्रेंड' बताने पर भारतीय क्रिकेटर ने अदालत का दरवाजा खटखटाया, 9 जुलाई को होगी अगली सुनवाई।

Sports News: भारतीय क्रिकेट टीम के युवा सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने अपनी पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। क्रिकेटर ने आरोप लगाया है कि सोशल मीडिया पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से उनकी तस्वीरों को कथित तौर पर तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है, जिससे उनकी छवि प्रभावित हो रही है। मामले की सुनवाई मंगलवार को हुई, जिसके बाद अदालत ने अगली सुनवाई 9 जुलाई तय की है।

क्या है पूरा मामला?

अभिषेक शर्मा की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर उनकी महिला मैनेजर के साथ मौजूद एक सामान्य तस्वीर को AI तकनीक के जरिए इस तरह पेश किया गया कि उन्हें उनकी ‘गर्लफ्रेंड’ बताया जाने लगा।

क्रिकेटर का कहना है कि यह केवल तस्वीर साझा करने का मामला नहीं है, बल्कि तकनीक का इस्तेमाल कर उनकी छवि और व्यक्तित्व को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है।

कोर्ट में क्या हुई बहस?

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की एकल पीठ ने की। अभिषेक शर्मा की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि सोशल मीडिया पर AI से तैयार की गई तस्वीरें और भ्रामक पोस्ट उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा रही हैं।

वहीं, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि कुछ लिंक केवल सामान्य पैपराजी तस्वीरों से जुड़े हैं और उन्हें पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन नहीं माना जा सकता।

इस पर अभिषेक शर्मा के वकील ने कहा कि विवाद सिर्फ फोटो प्रकाशित करने का नहीं, बल्कि AI के जरिए तस्वीरों को बदलकर गलत संदेश फैलाने का है।

कोर्ट की अहम टिप्पणी

सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने डिजिटल दौर में बढ़ती चुनौतियों पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि आज के समय में मानहानि (Defamation) और पर्सनैलिटी राइट्स के बीच की सीमा काफी धुंधली होती जा रही है।

कोर्ट ने माना कि कई बार कोई सामग्री न सिर्फ किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि उसके व्यक्तित्व अधिकारों का भी उल्लंघन करती है।

मेटा ने क्या कहा?

मेटा की ओर से अदालत में कहा गया कि शुरुआत में शिकायत करीब 25 वेब लिंक को लेकर थी, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर लगभग 4,000 URLs तक पहुंच गई है।

कंपनी का तर्क था कि यदि इतनी बड़ी संख्या में कंटेंट हटाने का आदेश दिया जाता है, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए इंटरनेट पर मौजूद हर आलोचनात्मक सामग्री की निगरानी करना बेहद कठिन हो जाएगा।

कोर्ट ने मांगे स्क्रीनशॉट

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अभिषेक शर्मा की ओर से विवादित URLs की सूची तो दी गई है, लेकिन उन लिंक के स्क्रीनशॉट याचिका के साथ संलग्न नहीं किए गए हैं।

इस पर हाई कोर्ट ने क्रिकेटर के वकील को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से पहले एक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल किया जाए, जिसमें सभी विवादित लिंक के स्क्रीनशॉट भी शामिल हों।

अब इस मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को होगी।

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क्यों अहम है यह मामला?

यह मामला केवल एक क्रिकेटर की छवि तक सीमित नहीं है, बल्कि AI तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल, सोशल मीडिया पर गलत जानकारी और डिजिटल युग में पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा से भी जुड़ा है। अदालत का अंतिम फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल बन सकता है।

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