‘गंगा में नॉन-वेज फेंकने से आहत हो सकती हैं धार्मिक भावनाएं’, HC ने 8 आरोपियों को दी जमानत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी गंगा इफ्तार विवाद मामले में 8 आरोपियों को जमानत दी। कोर्ट ने कहा कि गंगा में नॉन-वेज फेंकने से धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं और सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है।
UP News : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के चर्चित गंगा इफ्तार विवाद मामले में 8 आरोपियों को जमानत दे दी है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि गंगा नदी में नॉन-वेज भोजन के अवशेष फेंकने से धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं और इससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका रहती है।
यह मामला मार्च 2026 में वाराणसी में गंगा नदी के बीच नाव पर आयोजित इफ्तार पार्टी से जुड़ा है। आरोप है कि पार्टी के दौरान नॉन-वेज भोजन किया गया और बचा हुआ खाना गंगा में फेंका गया।
दो अलग-अलग आदेशों में मिली जमानत
हाईकोर्ट के जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला और जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने दो अलग-अलग आदेशों में कुल 8 आरोपियों को जमानत दी।
जस्टिस शुक्ला ने अपने आदेश में कहा कि कुछ लोगों के कार्यों से धार्मिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है और इससे बड़ी घटनाएं भी जन्म ले सकती हैं।
सोशल मीडिया पर भी कोर्ट की टिप्पणी
कोर्ट ने अपने आदेश में सोशल मीडिया के प्रभाव का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि सोशल मीडिया सूचना साझा करने का बड़ा माध्यम है, लेकिन इसके गलत इस्तेमाल से सामान्य जनजीवन और सामाजिक शांति प्रभावित हो सकती है।
हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि जमानत याचिका पर सुनवाई करते समय अदालत को केवल मामले के तथ्यों तक सीमित रहना होता है।
आरोपियों ने जताया पछतावा
आदेश में कहा गया कि आरोपियों और उनके परिवारों ने समाज को हुई पीड़ा पर खेद जताया है। वहीं मामले में अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 18 मई की तारीख तय की गई है।
FIR में क्या हैं आरोप?
यह मामला 16 मार्च को दर्ज हुई FIR से जुड़ा है। शिकायत भाजपा युवा मोर्चा की वाराणसी इकाई के अध्यक्ष रजत जायसवाल ने दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 15 मार्च को कुछ लोगों ने गंगा नदी में नाव पर रमजान का रोजा खोला, नॉन-वेज भोजन किया और बचा हुआ कचरा गंगा में फेंक दिया, जिससे हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया, जिनमें धार्मिक स्थल को अपवित्र करने और धार्मिक भावनाएं भड़काने से जुड़ी धाराएं शामिल हैं।
निचली अदालत ने खारिज की थी जमानत
इससे पहले 1 अप्रैल को वाराणसी की सत्र अदालत ने आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि प्रथम दृष्टया आरोपियों का उद्देश्य सामाजिक सौहार्द बिगाड़ना प्रतीत होता है।



