National News: सुरक्षित और कानूनी प्रवासन पर भारत का बड़ा कदम, 26 देशों के साथ समझौते! डॉ. एस. जयशंकर
ह्यूमन रिसोर्स मोबिलिटी पार्टनरशिप फोरम में बोले विदेश मंत्री, ई-माइग्रेट 2.0 से 50 लाख से अधिक प्रवासन मंजूरियां जारी, अवैध प्रवासन पर जताई चिंता
National News: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत सुरक्षित, व्यवस्थित और पूरी तरह से कानूनी प्रवासन (माइग्रेशन) को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में कुशल पेशेवरों की आवाजाही अब व्यापार और निवेश की तरह ही विकास का एक महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है। भारत इस दिशा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को लगातार मजबूत कर रहा है।
नई दिल्ली में आयोजित पहले ह्यूमन रिसोर्स मोबिलिटी पार्टनरशिप फोरम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने बताया कि भारत अब तक दुनिया के 26 देशों के साथ 28 प्रवासन एवं गतिशीलता साझेदारी समझौते (Migration and Mobility Partnership Agreements) या उनके समकक्ष समझौतों पर हस्ताक्षर कर चुका है। इसके अलावा कई अन्य देशों के साथ भी इस दिशा में बातचीत अंतिम चरण में है।
मानव संसाधन की वैश्विक आवाजाही को बताया विकास का इंजन
विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय फोरम में डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत केवल अपने नागरिकों के लिए विदेशों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव संसाधन की सुरक्षित और व्यवस्थित अंतरराष्ट्रीय आवाजाही को वैश्विक सहयोग का एक महत्वपूर्ण स्तंभ मानता है।
उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में कुशल पेशेवरों की मांग लगातार बढ़ रही है और ऐसे में भरोसेमंद तथा पारदर्शी प्रवासन व्यवस्था सभी देशों के लिए लाभदायक होगी।
ई-माइग्रेट 2.0 से 50 लाख से अधिक प्रवासन मंजूरियां
विदेश मंत्री ने प्रवासन प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए भारत के डिजिटल प्लेटफॉर्म ई-माइग्रेट 2.0 की सराहना की। उन्होंने बताया कि इस पोर्टल के माध्यम से अब तक 50 लाख से अधिक प्रवासन मंजूरियां (Migration Clearances) जारी की जा चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रणाली के कारण विदेश जाने वाले भारतीय कामगारों को सुरक्षित और पारदर्शी प्रक्रिया का लाभ मिल रहा है तथा फर्जी एजेंटों और धोखाधड़ी की घटनाओं में कमी लाने में भी मदद मिली है।
अवैध प्रवासन और मानव तस्करी पर जताई चिंता

डॉ. जयशंकर ने मानव तस्करी, अवैध प्रवासन और धोखाधड़ी करने वाले बिचौलियों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर संयुक्त कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अवैध प्रवासन न केवल लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि यह वैध प्रवासन व्यवस्था की विश्वसनीयता को भी कमजोर करता है।
उन्होंने सभी देशों से अपील की कि सुरक्षित और कानूनी प्रवासन को बढ़ावा देने के साथ-साथ अवैध नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।
भविष्य में बढ़ेगी हेल्थकेयर और केयरगिविंग सेक्टर की मांग
विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया के कई देशों में जनसंख्या तेजी से वृद्ध हो रही है। ऐसे में आने वाले वर्षों में हेल्थकेयर, केयरगिविंग और बुजुर्गों की देखभाल से जुड़े क्षेत्रों में प्रशिक्षित पेशेवरों की मांग तेजी से बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था में जहां टेक इकोनॉमी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, वहीं सिल्वर इकोनॉमी यानी बुजुर्गों से जुड़ी सेवाओं का क्षेत्र भी रोजगार और आर्थिक विकास का बड़ा केंद्र बनेगा।
पांच देशों के साथ सहयोग बढ़ाने पर विशेष चर्चा
दो दिवसीय ह्यूमन रिसोर्स मोबिलिटी पार्टनरशिप फोरम में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और विभिन्न देशों के नियोक्ताओं को एक मंच पर लाया गया है।
फोरम के दौरान भारत के साथ हाल ही में गतिशीलता समझौते करने वाले जर्मनी, इटली, जापान, रूस और डेनमार्क के साथ सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए विस्तृत द्विपक्षीय चर्चाएं भी आयोजित की जा रही हैं।
सुरक्षित प्रवासन को मिलेगी नई दिशा
विदेश मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह मंच वैश्विक प्रतिभाओं की सुरक्षित, पारदर्शी और न्यायसंगत आवाजाही को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि भारत भविष्य में भी अपने साझेदार देशों के साथ मिलकर सुरक्षित और कानूनी प्रवासन के लिए प्रभावी नीतियां विकसित करने की दिशा में कार्य करता रहेगा।
(रिपोर्ट: शाश्वत तिवारी)



