UP Kushinagar News: रजिस्ट्री निजीकरण के विरोध में अधिवक्ताओं का प्रदर्शन, सरकार से फैसला वापस लेने की मांग
कप्तानगंज तहसील में अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टाम्प विक्रेताओं और मुंशियों ने निजीकरण का किया विरोध, एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
UP Kushinagar News: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा रजिस्ट्री (बैनामा, दानपत्र आदि) प्रक्रिया के निजीकरण के प्रस्ताव के विरोध में सोमवार को तहसील कप्तानगंज में अधिवक्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के नेतृत्व में आयोजित बैठक में अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टाम्प विक्रेताओं और मुंशियों ने निजीकरण के प्रस्ताव का एक स्वर में विरोध करते हुए मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी मोहम्मद जफर को सौंपा।
तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष हीरा पाण्डेय की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में वक्ताओं ने कहा कि यदि रजिस्ट्री व्यवस्था का निजीकरण किया गया तो इससे दस्तावेज लेखक, स्टाम्प विक्रेता, मुंशी और इससे जुड़े हजारों लोगों की आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा। उनका कहना था कि इस निर्णय से बड़ी संख्या में लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है।
अधिवक्ताओं ने यह भी आशंका व्यक्त की कि निजीकरण लागू होने पर फर्जी और विवादित बैनामों की घटनाओं में वृद्धि हो सकती है। इससे भूमि संबंधी विवाद बढ़ेंगे और कानून-व्यवस्था की स्थिति भी प्रभावित हो सकती है। उनका कहना था कि वर्तमान व्यवस्था में सरकारी निगरानी के कारण पारदर्शिता बनी रहती है, जबकि निजीकरण से इस व्यवस्था पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
बैठक में सर्वसम्मति से उत्तर प्रदेश सरकार से रजिस्ट्री के निजीकरण संबंधी प्रस्ताव को तत्काल वापस लेने की मांग की गई। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

बैठक के बाद अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी मोहम्मद जफर को सौंपा और सरकार से जनहित तथा रोजगार की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील की।
इस दौरान मिर्जा एक्तेदार हुसैन, विनोद कुमार मिश्रा, उमेश चंद्र दूबे, राजन पाण्डेय, सतीश चंद्र गोंड, लालमन सिंह, संजय सिंह, हरिश्चंद्र श्रीवास्तव, देवेंद्र नाथ श्रीवास्तव, गोविन्द कुमार, मनोज कुमार, दारा यादव, दिवाकर गुप्ता सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता, दस्तावेज लेखक, स्टाम्प विक्रेता और मुंशी मौजूद रहे।



