UP Mau News: राजस्व व चकबंदी न्यायालयों में 22 व 23 जून को न्यायिक कार्य ठप, 24 जून से डीएम-एडीएम कोर्ट का बहिष्कार
डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन ने जिलाधिकारी के रवैये के विरोध में पारित किया निंदा प्रस्ताव
UP Mau News: डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन मऊ की एक महत्वपूर्ण बैठक शनिवार को संपन्न हुई, जिसमें जिला प्रशासन के उपेक्षापूर्ण रवैये और अधिवक्ताओं की मांगों पर कार्रवाई न होने को लेकर गहरा रोष व्यक्त किया गया। एसोसिएशन ने जिलाधिकारी मऊ के रवैये को हठधर्मिता से प्रेरित बताते हुए सर्वसम्मति से एक कड़ा प्रस्ताव पारित किया है। इसके तहत 22 और 23 जून को जनपद के सभी राजस्व एवं चकबंदी न्यायालयों में अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे।
बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि न्यायालयों में विचाराधीन मामलों में आदेश पारित होने में अत्यधिक विलंब तथा उससे बढ़ रहे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से 3 जून 2026 को जिलाधिकारी मऊ को 9 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा गया था। उस समय जिलाधिकारी ने 15 दिनों के भीतर मामले की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की जानकारी देने का आश्वासन दिया था।
अधिवक्ताओं का आरोप है कि निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद न तो किसी कार्रवाई की सूचना दी गई और न ही धरातल पर कोई ठोस कदम उठाया गया। अधिवक्ताओं का कहना है कि 18 जून 2026 को डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन द्वारा पारित एक अन्य प्रस्ताव पर भी जिलाधिकारी ने सकारात्मक रुख अपनाने के बजाय उसका अनादर किया। इसे अधिवक्ताओं के सम्मान पर आघात और प्रशासन की हठधर्मिता बताया गया।
एसोसिएशन के निर्णय के अनुसार 22 और 23 जून को सांकेतिक हड़ताल के तहत जनपद के सभी राजस्व एवं चकबंदी न्यायालयों में कोई भी अधिवक्ता न्यायिक कार्य नहीं करेगा तथा पूर्ण रूप से अवकाश पर रहेगा।
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इसके अलावा 24 जून 2026 से जिलाधिकारी मऊ एवं अपर जिलाधिकारी मऊ के न्यायालयों का पूर्ण बहिष्कार किए जाने का निर्णय लिया गया है। अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया है कि इन दोनों न्यायालयों की कार्यवाही में किसी प्रकार का सहयोग नहीं किया जाएगा।
20 जून को पारित इस प्रस्ताव की प्रति जनपद के सभी अधिवक्ता संघों एवं अधिवक्ताओं को सोशल मीडिया के माध्यम से प्रेषित करने का निर्णय लिया गया है, ताकि आंदोलन को व्यापक समर्थन मिल सके।
अधिवक्ताओं के इस फैसले के बाद तहसील और जिला मुख्यालय परिसर में प्रशासनिक एवं न्यायिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। माना जा रहा है कि यदि गतिरोध जारी रहा तो आम जनता के राजस्व और चकबंदी से जुड़े मामलों की सुनवाई प्रभावित हो सकती है।



